BHU में आवारा कुत्तों को लेकर बढ़ा विवाद, नगर निगम पर मदद नहीं करने का आरोप
वाराणसी। बीएचयू परिसर में बच्चे पर कुत्ते के हमले के बाद आवारा कुत्तों को लेकर विवाद और गहरा गया है। बीएचयू के प्रॉक्टोरियल बोर्ड का आरोप है कि परिसर में आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए नगर निगम से लगातार मदद मांगी जा रही है, लेकिन अब तक अपेक्षित सहयोग नहीं मिला है। वहीं नगर निगम ने बीएचयू के इस दावे को सिरे से खारिज किया है।
बीएचयू ने नगर निगम को पत्र भेजने की बात कही
प्रॉक्टोरियल बोर्ड के मुताबिक, बीएचयू जैसे बड़े परिसर में आवारा कुत्तों को पकड़ने और उन्हें दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए नगर निगम की टीम की जरूरत है। बोर्ड का कहना है कि इस संबंध में नगर निगम को लगातार पत्र भेजे जा रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस मदद नहीं मिली है।
चीफ प्रॉक्टर डॉ. संदीप पोखरिया ने बताया कि वह फिलहाल अवकाश पर हैं, जबकि प्रॉक्टोरियल बोर्ड की ओर से मामले की जांच जारी है।
नगर निगम ने कहा- मदद मांगी ही नहीं गई
दूसरी ओर वाराणसी नगर निगम ने बीएचयू के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। नगर निगम के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय अमृत लाल ने कहा कि इस मामले में नगर निगम से कोई मदद नहीं मांगी गई है।
उनके मुताबिक, बीएचयू के एक अधिकारी ने फोन करके उनसे कुत्तों से जुड़े नियमों की जानकारी जरूर ली थी। अधिकारी का कहना था कि बीएचयू किसी संस्था के साथ समझौते के जरिए परिसर से कुत्तों को खुद हटवा रहा है।
कुत्तों को लेकर दो विभागों के दावे अलग
बीएचयू और नगर निगम के बयानों के बाद मामले में दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग नजर आ रहे हैं। बीएचयू का कहना है कि आवारा कुत्तों को हटाने के लिए नगर निगम को पत्र भेजे गए हैं, जबकि नगर निगम का दावा है कि उसे इस संबंध में कोई औपचारिक मदद नहीं मांगी गई।
ऐसे में अब यह स्पष्ट होना बाकी है कि परिसर से आवारा कुत्तों को हटाने और उनकी समस्या के समाधान के लिए दोनों संस्थाओं के बीच आधिकारिक स्तर पर क्या पत्राचार हुआ है।
ये भी पढ़ें - BHU में बच्चे पर कुत्ते के हमले से हड़कंप, 50 टांके लगे, VC ने ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर जाना हाल
बच्चे पर कुत्ते के हमले के बाद मामला गंभीर
बीएचयू परिसर में 11 वर्षीय बच्चे पर कुत्ते के हमले के बाद यह मुद्दा और गंभीर हो गया है। बच्चे के इलाज के दौरान बीएचयू कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर उसका हाल जाना था।
इसके बाद परिसर में पालतू और आवारा कुत्तों से जुड़ी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
फिलहाल प्रॉक्टोरियल बोर्ड की जांच और बीएचयू तथा नगर निगम के बीच सामने आए अलग-अलग दावों के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परिसर में कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
