आईएमएस-बीएचयू में 19 मई को विश्व आईबीडी दिवस का आयोजन, विशेषज्ञ देंगे आधुनिक उपचार की जानकारी
वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस) अंतर्गत गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग द्वारा 19 मई 2026 को विश्व आईबीडी दिवस (World IBD Day) का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम दोपहर 1 बजे अस्पताल स्थित डॉक्टर लाउंज में आयोजित होगा, जिसमें 300 से अधिक मरीजों और उनके परिजनों के शामिल होने की संभावना है।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य इन्फ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज (IBD) जैसी गंभीर आंत संबंधी बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करना, समय पर पहचान और आधुनिक उपचार पद्धतियों की जानकारी देना है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बीएचयू के कुलपति डॉ. अजीत कुमार चतुर्वेदी होंगे। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में आईएमएस निदेशक डॉ. एस.एन. संखवार, चिकित्सा संकाय के अधिष्ठाता डॉ. संजय गुप्ता और सर सुंदरलाल चिकित्सालय के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. के.के. गुप्ता उपस्थित रहेंगे।
गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. देवेश प्रकाश यादव कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम में विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एस.के. शुक्ला, डॉ. अनुराग कुमार तिवारी, डॉ. विनोद कुमार और डॉ. ब्रजेश कुमार भी मौजूद रहेंगे। विभाग के शोधार्थी, सीनियर रेजिडेंट्स और चिकित्सा कर्मी भी सक्रिय सहभागिता करेंगे।
गौरतलब है कि विभाग में संचालित विशेष IBD क्लिनिक में अब तक करीब 2000 मरीज पंजीकृत हो चुके हैं। वर्ष 2018 से डॉ. देवेश प्रकाश यादव के नेतृत्व में यह क्लिनिक लगातार संचालित किया जा रहा है, जहां पूर्वांचल सहित आसपास के राज्यों से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार IBD आंतों में सूजन से जुड़ी गंभीर बीमारी है, जिसमें लगातार पेट दर्द, दस्त, कमजोरी, वजन कम होना और मल में रक्त आने जैसी समस्याएं होती हैं। समय पर उपचार न मिलने पर यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
कार्यक्रम में फीकल माइक्रोबायोटा ट्रांसप्लांटेशन (FMT) जैसी आधुनिक उपचार तकनीक पर भी चर्चा की जाएगी। विशेषज्ञ बताएंगे कि यह तकनीक आंतों में स्वस्थ बैक्टीरिया संतुलन स्थापित कर मरीजों को राहत पहुंचाने में प्रभावी साबित हो रही है।
इसके अलावा मरीजों को सही खान-पान और जीवनशैली अपनाने के लिए भी जागरूक किया जाएगा। विशेषज्ञ हल्का, सुपाच्य और पौष्टिक भोजन लेने, पर्याप्त पानी पीने और जंक फूड, मसालेदार भोजन, धूम्रपान एवं शराब से दूर रहने की सलाह देंगे।
कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र, स्वास्थ्य परामर्श शिविर और जागरूकता गतिविधियों का भी आयोजन किया जाएगा। गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने चिकित्सकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आमजन से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है।
