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बीएचयू के डॉक्टरों ने बचाई मरीज की जान, खाने की नली में फंसा नकली दांत एंडोस्कोपी से निकाला

                                                         डॉ. अनुराग तिवारी

 

वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में डॉक्टरों ने एक जटिल चिकित्सा प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए मरीज की जान बचाई। विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. अनुराग तिवारी और उनकी टीम ने 20 दिनों से खाने की नली में फंसे नकली दांत को एंडोस्कोपी के माध्यम से सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

जानकारी के अनुसार मरीज लंबे समय से खाना नहीं खा पा रहा था, क्योंकि नकली दांत उसकी खाने की नली में बुरी तरह फंस गया था। मरीज ने बीएचयू अस्पताल की ओपीडी में पहुंचकर इलाज कराया।

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डॉ. अनुराग तिवारी ने बताया कि सामान्य रूप से खाने की नली में फंसी किसी विदेशी वस्तु को एंडोस्कोपी से निकालना आसान प्रक्रिया होती है, लेकिन इस मामले में नकली दांत बेहद खतरनाक स्थिति में फंसा हुआ था। दांत निकालने के दौरान खाने की नली फटने का भी गंभीर खतरा बना हुआ था।

करीब 45 मिनट तक चली जटिल एंडोस्कोपी प्रक्रिया के बाद डॉक्टरों की टीम ने बिना किसी दुर्घटना के सफलतापूर्वक नकली दांत निकाल लिया। चिकित्सकों ने मरीज को दो घंटे बाद ही भोजन करने की अनुमति दे दी। फिलहाल मरीज पूरी तरह स्वस्थ बताया जा रहा है।

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इसी बीच आईएमएस-बीएचयू के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग की ओर से 19 मई 2026 को विश्व आईबीडी दिवस के आयोजन की भी तैयारी की जा रही है। अस्पताल स्थित डॉक्टर लाउंज में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में 300 से अधिक मरीजों और उनके परिजनों के शामिल होने की संभावना है।

                                                             डॉ. अनुराग तिवारी                                                     डॉ. अनुराग तिवारी
 डॉ. अनुराग तिवारी

कार्यक्रम में आईबीडी यानी इन्फ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज के आधुनिक उपचार, खान-पान, जीवनशैली और फीकल माइक्रोबायोटा ट्रांसप्लांटेशन (FMT) जैसी उन्नत तकनीकों पर विशेषज्ञ चिकित्सक जानकारी देंगे। कार्यक्रम में बीएचयू के कुलपति डॉ. अजीत कुमार चतुर्वेदी समेत कई वरिष्ठ चिकित्सक और विशेषज्ञ मौजूद रहेंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार आईबीडी आंतों से जुड़ी गंभीर बीमारी है, जिसमें पेट दर्द, दस्त, कमजोरी, वजन कम होना और मल में खून आने जैसी समस्याएं होती हैं। समय पर उपचार और सही खान-पान से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।

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