बाबा विश्वनाथ के भक्तों के लिए अच्छी खबर, अब कम दाम में मिलेगा फूल-माला और प्रसाद
बाबा विश्वनाथ के भक्तों के लिए अच्छी खबर, अब कम दाम में मिलेगा फूल-माला और प्रसाद

वाराणसी। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में दर्शन-पूजन के लिए देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अच्छी खबर है। विश्वनाथ धाम के बाहर दुकान संचालित करने वाले दुकानदारों ने तय किया है कि अब वह श्रद्धालुओं से मनमाना दाम नहीं वसूलेंगे।

सभी दुकानदार आपसी सहमति से फूल-माला और प्रसाद के वाजिब दाम की रेट सूची बनाएंगे।

प्रत्येक दुकान पर रेट सूची टंगी रहेगी। जो भी दुकानदार अब मनमाना दाम वसूलेगा उसके खिलाफ पुलिस कार्रवाई करेगी।

यह निर्णय आज चौक थाने में एसीपी दशाश्वमेध अवधेश पांडेय की अध्यक्षता में इंस्पेक्टर चौक शिवाकांत मिश्र और दुकानदारों की बैठक में लिया गया है। तीन दिन में इस निर्णय को दुकानदार हर हाल में लागू करेंगे।

पुलिस और दुकानदारों के बीच तय हुई बातें

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के आसपास फूल-माला और प्रसाद बेचने वाले सभी दुकानदार आपसी सहमति से एक उचित मूल्य सूची तय करेंगे। उसी के आधार पर फूल-माला और फल प्रसाद की बिक्री की जाएगी।


सभी दुकानदार अपनी दुकान पर मूल्य सूची अंकित करवाएंगे। जिससे श्रद्धालुओं को असुविधा न हो।
यदि कोई नाबालिग फूल-माला और प्रसाद बेचता हुआ पाया गया तो दुकानदार के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


सभी दुकानदार श्रद्धालुओं के साथ विनम्रता पूर्वक व्यवहार करेंगे, जिससे काशी की छवि पर्यटकों की नजर में अच्छी बनी रहे।
श्रद्धालुओं से अनुरोध किया जाएगा कि वह प्रसाद और फूल-माला दुकानदार से लेते समय मूल्य सूची के अनुसार ही भुगतान करें।


तीन दिन में मूल्य सूची का निर्धारण करा कर उसको प्रकाशित करा दिया जाएगा।
किसी भी तरह की समस्या आने पर तत्काल उसके बारे में पुलिस को अवगत कराया जाएगा।

वाराणसी में ज्ञानवापी मामले पर शान्तनु महाराज ने कहा- यह देश हिंदुओं का है और हिन्दू मान्यताओं के अनुसार चलेगा

वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान संस्थान के शताब्दी कृषि प्रेक्षागृह में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के छठवें दिन प्रख्यात मानस मर्मज्ञ आचार्य शान्तनु महाराज ने रामचरित मानस के विभिन्न पहलुओं की व्याख्या की।

असाध्य बीमारी से जूझ रहे बालक की मदद के लिए कथा के आयोजन की बात कही। साथ ही लोगों से अच्छे कामों का विरोध न करने का अनुरोध किया। 

उन्होंने कहा कि अहंकार को दूर करना बहुत जरूरी है। भगवान जब किसी अहंकारी का अहंकार तोड़ते हैं तो पहले उसे भी यह नहीं पता चलता। कथा के छठें दिवस मानस के सीता स्वयंवर, धनुष लीला प्रसंग के कथा का वाचन हुआ।

आचार्य ने बताया कि धनुष अहंकार का प्रतीक है उसे तोड़ना भगवान के लिए बहुत आसान है, किन्तु फूल भक्तों की भावना का प्रतीक है, उसे तोड़ना भगवान के लिए बहुत दुष्कर कार्य है। 

उन्होंने कहा कि हमें अच्छे कार्य का विरोध नहीं करना चाहिए। अगर हम किसी अच्छे कार्य में भागीदार नहीं बन सकते तो उसमें बाधा भी नहीं उत्पन्न करना चाहिए। हमें अपने श्रम, शक्ति, ऊर्जा, धन-संसाधन को किसी अच्छे कार्य का विरोध करने में लगाने से बचना चाहिए।

भले व्यक्ति अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करने से बचें। इस अवसर पर डा. राजेश सिंह, तारा सिंह व प्रो. राकेश सिंह, अन्नपूर्णा सिंह आदि मौजूद रहे।

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अब NCR की तर्ज पर विकसित होगा बनारस परिक्षेत्र, आसपास के 12 जिले एक ही में होंगे समाहित...

अब NCR की तर्ज पर विकसित होगा बनारस परिक्षेत्र, आसपास के 12 जिले एक ही में होंगे समाहित...

राष्ट्रीय राजधानी परिक्षेत्र (एनसीआर) की तर्ज पर वृहद बनारस परिक्षेत्र बनाने की शासन स्तर पर तैयारी की जा रही है। वाराणसी के साथ आजमगढ़, मिर्जापुर और प्रयागराज मंडल के 12 जिलों को समाहित करते हुए वृहद बनारस की परिकल्पना को साकार किया जाएगा। 

वृहद बनारस परिक्षेत्र के मसौदे को धरातल पर उतारने के लिए शासन स्तर पर चार से ज्यादा बैठकें हो चुकी हैं। बनारस को पूर्वी उत्तर प्रदेश की राजधानी की तरह विकसित करने की तैयारी है। इसकी योजना तैयार की जा रही है।

महानगर का स्वरूप ले चुकी काशी में रोजगार की तेजी से बढ़ रही संभावनाओं और आबादी के दबाव को देखते हुए इस परिक्षेत्र की रूपरेखा बनाई जा रही है।

चार मंडलों के जिलों की सीमा को जोड़कर विशेष प्लान तैयार किया जा रहा है। पूरे परिक्षेत्र के विकास के लिए राज्य सरकार विशेष पैकेज पर भी विचार कर रही है। इसमें आवासीय, औद्योगिक, व्यावसायिक विकास सहित अन्य पहलुओं पर संभावनाएं तलाशी जाएंगी।

इसके लिए चारों मंडलायुक्त और 12 जिलों के जिलाधिकारियों की एक विशेष टीम भी गठित की गई है। संबंधित जिलों में विकास की संभावनाओं पर प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है। साथ ही उन्हें जमीन पर उतारने की तैयारी की जा रही है।

वृहद बनारस में शामिल होेंगे ये जिले-

वृहद बनारस में वाराणसी के साथ मंडल के चंदौली, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़ मंडल के आजमगढ़, मऊ व बलिया, मिर्जापुर मंडल के मिर्जापुर, भदोही व सोनभद्र और प्रयागराज के प्रयागराज व प्रतापगढ़ जिले शामिल होंगे। 

पांच दशक की विकास संभावनाओं पर बन रहा प्रस्ताव : वृहद बनारस परिक्षेत्र में मजबूत कनेक्टिविटी के लिए इन शहरों को मेट्रो सेवा से जोड़ने पर विचार किया जा रहा है।

सड़कों की मजबूत कनेक्टिविटी के अलावा आसपास के जिलों में आवासीय क्षेत्र विकसित करने का भी प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

वाराणसी की जरूरतों को पूरा करने के लिए वृहद बनारस के जिलों में अलग-अलग सुविधाएं विकसित की जाएंगी। पांच दशक की विकास संभावनाओं पर प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

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