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WPPS CEO’s Conclave 2026: नई सोच, नई तकनीक और नई गेहूं वैल्यू चेन पर जोर

 WPPS CEO’s Conclave 2026: नई सोच, नई तकनीक और नई गेहूं वैल्यू चेन पर जोर

 

वाराणसी। व्हीट प्रोडक्ट्स प्रमोशन सोसायटी (WPPS) एवं उत्तर प्रदेश रोलर फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन (UPRFMA) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय WPPS CEO’s Conclave 2026 का रविवार को होटल ताज गंगेज में समापन हुआ। "Redefining Wheat Value Chains for a New India" थीम पर आयोजित इस सम्मेलन में देश-विदेश के कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और फ्लोर मिलिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भारत की गेहूं वैल्यू चेन को अधिक स्थिर, गुणवत्ता आधारित और तकनीक-सक्षम बनाने पर विस्तार से चर्चा की।

 

कॉन्क्लेव में 22 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के 85 शहरों से आए 400 से अधिक प्रतिनिधियों तथा 50 से अधिक वक्ताओं, मॉडरेटरों और पैनलिस्टों ने भाग लिया। अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, यूरोप, तुर्की और नेपाल सहित कई देशों के विशेषज्ञ भी सम्मेलन से जुड़े। इसमें फ्लोर मिलर्स, अनाज व्यापारी, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, बेकरी उद्योग, पोषण विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और तकनीकी विशेषज्ञों ने भागीदारी की।

सम्मेलन में गेहूं नीति में स्थिरता, सरकारी खरीद प्रणाली, खुले बाजार में गेहूं की उपलब्धता, निर्यात नीति और मूल्य निर्धारण जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकारी एजेंसियों द्वारा बड़े पैमाने पर खरीद के बाद खुले बाजार में गेहूं की उपलब्धता प्रभावित होती है, जिससे फ्लोर मिलों को खरीद, इन्वेंट्री प्रबंधन और मूल्य स्थिरता बनाए रखने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

 WPPS CEO’s Conclave 2026: नई सोच, नई तकनीक और नई गेहूं वैल्यू चेन पर जोर

ICRIER के डिस्टिंग्विश्ड प्रोफेसर एवं नीति आयोग के पूर्व सदस्य प्रो. रमेश चंद ने कहा कि वर्तमान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) प्रणाली की समीक्षा समय की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि किसानों को सहायता देने के लिए प्राइस डिफिशिएंसी पेमेंट सिस्टम जैसे विकल्प अपनाए जा सकते हैं, जिससे किसानों को सुरक्षा मिलेगी, बाजार व्यवस्था अधिक प्रतिस्पर्धी होगी और सरकार पर वित्तीय बोझ भी कम होगा। उन्होंने कृषि अनुसंधान में निवेश बढ़ाने की भी आवश्यकता बताई।

उत्तर प्रदेश सरकार के स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं पूर्व मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह (सेवानिवृत्त IAS) ने किसानों, खरीद एजेंसियों, भंडारण व्यवस्था, फ्लोर मिलों, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और उपभोक्ताओं के बीच मजबूत समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने आधुनिक लॉजिस्टिक्स, मूल्य संवर्धन और बाजार आधारित कृषि प्रणाली को भविष्य की आवश्यकता बताया।

WPPS के चेयरमैन अजय गोयल ने कहा कि गेहूं को केवल एक खाद्यान्न नहीं, बल्कि किसानों से लेकर उपभोक्ताओं तक पूरी वैल्यू चेन को जोड़ने वाली आर्थिक श्रृंखला के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि भारत में वर्तमान में लगभग 120 मिलियन टन गेहूं उत्पादन हो रहा है तथा देश में 2,000 से अधिक फ्लोर मिलें, जिनमें 200 से अधिक आधुनिक मिलिंग इकाइयां शामिल हैं, कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि अब उद्योग का अगला चरण गुणवत्ता, वैज्ञानिक भंडारण, प्रसंस्करण दक्षता और मूल्य संवर्धित उत्पादों पर आधारित होगा।

सम्मेलन में वैज्ञानिक भंडारण व्यवस्था, आधुनिक साइलो, बल्क स्टोरेज, ग्रेडिंग, सफाई, मशीनीकृत हैंडलिंग और पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान कम करने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही लंबी दूरी तक अनाज परिवहन के लिए बल्क रेल मूवमेंट जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं को भी आवश्यक बताया गया।

मौसम और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पर चर्चा करते हुए स्काईमेट वेदर सर्विसेज के चेयरमैन जतिन सिंह ने कहा कि एल-नीनो को लेकर अत्यधिक चिंता की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने अगस्त और सितंबर के दौरान इंडियन ओशन डाइपोल के अनुकूल रहने की संभावना जताई।

विशेषज्ञों ने कहा कि वर्तमान समय में उपभोक्ता केवल आटा नहीं, बल्कि पोषण, गुणवत्ता, सुरक्षा और विशेष उपयोग वाले उत्पादों की मांग कर रहे हैं। इसी कारण ब्रेड, बिस्किट, केक, नूडल्स, पास्ता, रस्क और क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) उत्पादों के लिए विशेष प्रकार के आटे की मांग लगातार बढ़ रही है।

 WPPS CEO’s Conclave 2026: नई सोच, नई तकनीक और नई गेहूं वैल्यू चेन पर जोर

कॉन्क्लेव में खाद्य फोर्टिफिकेशन, खाद्य सुरक्षा, स्मार्ट ऊर्जा समाधान, ऑटोमेशन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल ग्रेन कॉमर्स तथा मूल्य संवर्धित गेहूं उत्पादों के विस्तार पर भी विशेष चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि भविष्य में उद्योग की वास्तविक वृद्धि केवल कमोडिटी आधारित आटे से नहीं, बल्कि ब्रांडेड, पोषण आधारित और उपयोग-विशेष गेहूं उत्पादों से होगी।

सम्मेलन के दौरान WPPS ने अपने "आई लव व्हीट" (I Love Wheat) अभियान को भी आगे बढ़ाया, जिसके माध्यम से गेहूं के पोषण, सांस्कृतिक महत्व और भारत की खाद्य सुरक्षा में उसकी भूमिका को रेखांकित किया गया।

कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि नीति निर्माता, फ्लोर मिलिंग उद्योग, अनाज व्यापारी, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, बेकरी उद्योग, तकनीकी विशेषज्ञ, पोषण विशेषज्ञ, भंडारण एवं लॉजिस्टिक्स क्षेत्र मिलकर भारत के लिए एक मजबूत, प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए तैयार गेहूं वैल्यू चेन का निर्माण करेंगे।

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