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विकसित भारत युवा कनेक्ट कार्यक्रम का आयोजन

विकसित भारत युवा कनेक्ट कार्यक्रम का आयोजन

वाराणसी। वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का उद्घोष है। यह शब्द हमारे राष्ट्र की सभ्यता, संस्कृति, संघर्ष और संकल्प का प्रतीक है। इन्हीं विचारों के साथ विकसित भारत युवा कनेक्ट कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें “विकसित भारत 2047” की परिकल्पना पर विस्तार से चर्चा की गई।

वाराणसी।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि वंदे मातरम् एक ऐसा सभ्यतागत मंत्र है, जो हमें भौतिक विकास के साथ-साथ नैतिक और सांस्कृतिक उन्नति की दिशा भी दिखाता है। विकसित भारत का अर्थ केवल आर्थिक प्रगति नहीं है, बल्कि ऐसा राष्ट्र बनाना है जहाँ शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता समान रूप से विकसित हों।

वाराणसी।

वंदे मातरम् हमें अपनी मातृभूमि के प्रति कर्तव्यबोध कराता है और यह स्मरण दिलाता है कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकार की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। विशेष रूप से आज के युवाओं के लिए यह मंत्र प्रेरणा का स्रोत है, जो उन्हें आत्मनिर्भर बनने, नवाचार को अपनाने और भारतीय मूल्यों के साथ वैश्विक मंच पर नेतृत्व करने की शक्ति देता है।

वाराणसी।

इस अवसर पर मिनिस्ट्री ऑफ यूथ अफेयर्स एंड स्पोर्ट्स, भारत सरकार के अंतर्गत माय भारत प्लेटफॉर्म द्वारा संचालित विकसित भारत युवा कनेक्ट कार्यक्रम के तहत चयनित यूथ आइकन दीक्षा चौरसिया, जबलपुर (मध्य प्रदेश) से, मुख्य अतिथि एवं वक्ता के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने “वंदे मातरम्: द सिविलाइजेशनल मंत्र फॉर विकसित भारत 2047” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि विकसित भारत 2047 की यात्रा केवल सरकारी नीतियों से नहीं, बल्कि सकारात्मक सोच, सामाजिक उत्तरदायित्व और सांस्कृतिक चेतना से पूरी होगी।

दीक्षा चौरसिया ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिकता को अपनाएँ और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएँ। उन्होंने कहा कि जब हम अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हुए नवाचार और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते हैं, तभी सच्चे अर्थों में विकसित भारत का निर्माण संभव है।

कार्यक्रम में कॉलेज प्राचार्य डॉ. सौरभ सेन, प्रशासिका सरिता राव, एकेडमिक एडवाइजर डॉ. विभा श्रीवास्तव, राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी हेरम्ब कुमार मिश्र सहित समस्त शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।


अंततः वक्ताओं ने कहा कि वंदे मातरम् हमें यह संकल्प दिलाता है कि हम एक ऐसे भारत का निर्माण करें जो समृद्ध, सशक्त और विश्व को मार्गदर्शन देने वाला हो। यही वंदे मातरम् का सच्चा संदेश है और यही विकसित भारत 2047 का मूल आधार है।

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