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BHU में जुटे 1300 वैज्ञानिक, CM योगी ने बताया विकसित भारत का वैज्ञानिक रोडमैप, AI पर भी दिया बड़ा संदेश

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वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में आयोजित विज्ञान भारती के 7वें राष्ट्रीय अधिवेशन में देश और विदेश से आए 1300 से अधिक वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं ने विकसित भारत की वैज्ञानिक दिशा पर व्यापक मंथन किया। दो दिवसीय इस राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि अनुसंधान और नवाचार किसी भी राष्ट्र की प्रगति का मूल आधार हैं। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान का समन्वय ही देश को वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाएगा। उन्होंने युवाओं से वैज्ञानिक अनुसंधान को समाज और राष्ट्रहित से जोड़ने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि अनुसंधान और नवाचार किसी भी राष्ट्र की प्रगति का मूल आधार हैं। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान का समन्वय ही देश को वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाएगा। उन्होंने युवाओं से वैज्ञानिक अनुसंधान को समाज और राष्ट्रहित से जोड़ने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय परंपराओं में कृषि, स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़े अनेक वैज्ञानिक तत्व मौजूद हैं, जिनकी उपयोगिता कोविड-19 महामारी के दौरान भी देखने को मिली। उन्होंने प्राकृतिक कृषि, सतत विकास, जमीनी नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय परंपराओं में कृषि, स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़े अनेक वैज्ञानिक तत्व मौजूद हैं, जिनकी उपयोगिता कोविड-19 महामारी के दौरान भी देखने को मिली। उन्होंने प्राकृतिक कृषि, सतत विकास, जमीनी नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।

बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि महामना मदन मोहन मालवीय का शिक्षा दर्शन आधुनिक विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय पर आधारित था। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय भारतीय मूल्यों पर आधारित वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख एवं विज्ञान भारती के पालक सुनील आंबेकर ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती तकनीकों का उपयोग मानव कल्याण और पर्यावरणीय संतुलन के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने वैज्ञानिक सोच को भारतीय भाषाओं और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने पर जोर दिया।

विज्ञान भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शेखर सी. मांडे ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी वैश्विक चुनौतियों का समाधान वैज्ञानिक अनुसंधान, नैतिकता और सभ्यतागत दृष्टिकोण के संतुलित समन्वय से ही संभव है।

विज्ञान भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शेखर सी. मांडे ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी वैश्विक चुनौतियों का समाधान वैज्ञानिक अनुसंधान, नैतिकता और सभ्यतागत दृष्टिकोण के संतुलित समन्वय से ही संभव है।

अधिवेशन की विशेष थीम ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता, विज्ञान और मानवता’ रखी गई है, जिसमें वैज्ञानिक विकास को मानवीय मूल्यों और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के साथ जोड़ने पर विशेष चर्चा की जा रही है। कार्यक्रम के दौरान विज्ञान भारती की स्मारिका, वार्षिक प्रतिवेदन और देश की प्रख्यात महिला वैज्ञानिकों पर आधारित विशेष प्रकाशनों का भी लोकार्पण किया गया।

विज्ञान भारती के इस राष्ट्रीय अधिवेशन में देशभर की 38 इकाइयों के प्रतिनिधियों सहित अनेक विश्वविद्यालयों के कुलपति, निदेशक और वरिष्ठ वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं। काशी में आयोजित यह आयोजन भारत के वैज्ञानिक भविष्य को नई दिशा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

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