काशी में 50 दिनों तक गूंजेगा वेद मंत्रों का स्वर, शुक्ल यजुर्वेद का होगा दंडक्रम पारायण
वाराणसी। धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में वैदिक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण आयोजन होने जा रहा है। हनुमान घाट स्थित श्री कांची कामकोटिश्वर मंदिर परिसर में 27 अक्टूबर से 15 दिसंबर 2026 तक श्रीशुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिन शाखा का कंठस्थ दंडक्रम पारायण आयोजित किया जाएगा। महर्षि वेदव्यास प्रतिष्ठान, पुणे और समर्थाद्वैत वेद पाठशाला, त्र्यंबकेश्वर के तत्वावधान में होने वाले इस आयोजन में वैदिक मंत्रों के पारंपरिक पाठ की विशिष्ट विधा का प्रदर्शन किया जाएगा।
मूलाम्नाय श्री कांची कामकोटि पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी शंकर विजयेन्द्र सरस्वती जी महाराज की प्रेरणा तथा स्वामी गोविंददेव गिरी जी महाराज के आशीर्वाद से आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर वैदिक विद्वानों और धर्मानुरागियों में विशेष उत्साह है।
आयोजन के संबंध में सोमवार को जानकारी देते हुए श्री कांची कामकोटि पीठ के प्रबंधक वीएस सुब्रमण्यम मणि, सुप्रसिद्ध वैदिक विद्वान के. वेंकटरमण घनपाठी, कार्यक्रम संयोजक गजानन ज्योतकर, शैलेंद्र काकडे गुरूजी तथा वीएस चंद्रशेखर चंद्रू ने बताया कि इस पारायण में अद्वैत और वेदोपासक शैलेंद्र समर्थ काकडे लगातार 50 दिनों तक श्रीशुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिन शाखा का कंठस्थ दंडक्रम पारायण करेंगे।
आयोजकों के अनुसार, चारों वेदों की एक हजार वर्षों की परंपरा के संदर्भ में यह आयोजन विशेष महत्व रखता है। पारायण की परीक्षा के लिए महाराष्ट्र से वेद भास्कर प्रशांत जोशी गुरूजी तथा वेदमूर्ति घनपाठी किरण शास्त्री पाठक उपस्थित रहेंगे।
प्रतिदिन चार घंटे होगा पारायण
कार्यक्रम के तहत प्रतिदिन सुबह आठ बजे से दोपहर 12 बजे तक वेद पारायण किया जाएगा। 27 अक्टूबर से शुरू होकर 15 दिसंबर तक चलने वाला यह आयोजन वैदिक ज्ञान, स्मृति परंपरा और प्राचीन भारतीय आध्यात्मिक विरासत को समर्पित रहेगा।
