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Varanasi News: रामजनम योगी की शंखध्वनि के साथ भवानी नंदन यति महाराज ने किया श्री मार्कण्डेय महादेव महोत्सव का शुभारम्भ

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Varanasi News: रामजनम योगी की शंखध्वनि के साथ भवानी नंदन यति महाराज ने किया श्री मार्कण्डेय महादेव महोत्सव का शुभारम्भ
 

गंगा गोमती का संगम बना सुर लय ताल के अद्भुत संगम का साक्षी श्री मार्कण्डेय महादेव महोत्सव में हंसराज रघुवंशी ने बहायी शिव भजनों कीअविरल धारा नटराज के सामने डॉ रंजना उपाध्याय के मनमोहक नृत्य ने श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध राघवेन्द्र शर्मा के भजनों ने किया श्रोताओं को भाव विभोर


चौबेपुर पुज्य संत भवानी नंदन यति महाराज ने मार्कण्डेय महादेव महोत्सव का शंखध्वनि की अद्भुत मंगलाचरण के साथ किया वैदिक रीति से शुभारम्भ। उन्होंने श्री मार्कण्डेय महादेव तीर्थ क्षेत्र में इस दिव्य भव्य महोत्सव का आयोजन कराने के लिए केंद्रीय मंत्री एवं सांसद चंदौली डॉ महेंद्र नाथ पाण्डेय को साधुवाद दिया।

इस तरह के आयोजन करने के लिए उन्होंने भारत सरकार एवं प्रदेश सरकार की प्रसंसा भी की।महोत्सव के शुभारम्भ के अवसर पर 5 मिनट तक निरंतर रामजनम योगी की शंख ध्वनि ने उपस्थित लोगों को अचंभित कर दिया।

पांडाल में शंखध्वनि के साथ-साथ हर हर महादेव के नारों से गुंजायमान हो रहा था। वातावरण में सकारात्मक उर्जा की ऐसी अनुभूति हो रही थी जो केवल अनुभव ही की जा सकती है।

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 संगीत प्रकृति के हर कण में मौजूद है। भगवान शिव को 'संगीत का जनक' माना जाता है। शिवमहापुराण के अनुसार शिव के पहले संगीत के बारे में किसी को भी जानकारी नहीं थी।

नृत्य, वाद्य यंत्रों को बजाना और गाना उस समय कोई नहीं जानता था, क्योंकि शिव ही इस ब्रह्मांड में सर्वप्रथम आए हैं।आज कैथी श्री मार्कण्डेय महादेव महोत्सव का शुभारम्भ शंख ध्वनि से होने के साथ ही सम्पूर्ण वातावरण मानो शिव से साक्षात्कार करा हो ऐसा उपस्थित श्रोताओं  को ऐसी अनुभूति हुयी।जब किसी कार्यक्रम के शुभारम्भ में ही वातावरण में सकारात्मक उर्जा प्रवाहित हो जाय तो समापन कब है जाता है पता नहीं चलता।

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वेसे भी नटराज भगवान शिव का ही रूप है जब शिव तांडव करते हैं तो उनका यह रूप नटराज कहलाता है। नटराज शब्द दो शब्दों के मेल से बना है। नट और राज नट का अर्थ है 'कला' और राज का अर्थ है राजा।

भगवान शंकर का नटराज रूप इस बात का सूचक है कि अज्ञानता को सिर्फ ज्ञान संगीत और नृत्य से ही दूर किया जा सकता है।आज महोत्सव में शिव भक्ति की असीम उर्जा में मंच पर पहली प्रस्तुति देने आयी ख्याति नृत्यांगना डॉ रंजना उपाध्याय ने वी सुरेस्वरी भगवती गंगे शंकर मौलि बिहारी तरंगें बोल पर पैरों  की लयकारी की अद्भुत  कला को प्रदर्शित किया।

पैरों में बंधे घुंघरूओं के गुच्छों में मानों हर घुंघरू शिव अराधना में स्वयं को समर्पित कर रहा हो।समुह नृत्य में श्री राम की स्तुति नमामि भक्त वत्सलम् कृपालु शील कोमलम् पर कलाकारों ने लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।श्रोताओं की शांति पण्डाल में एक एक घुंघरू के आवाज पर तालियां ही तोड़ रही थी।


राघवेन्द्र शर्मा का भजन श्रोताओं को आया पसंद महोत्सव में द्वितीय प्रस्तुति राघवेन्द्र शर्मा ने हे शम्भु तिहारी इच्छा से द्वार तिहारे आया गाकर शिव के दरृबार में अपनी हाजिरी लगायी।उड़ती चिरैया से कहलि कौशल्या तथा जितना दिया सरकार ने मुझको गाकर श्रोताओं को झुमने पर मजबूर कर दिया।

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मेरा भोला है भंडारी करे नंदी की सवारी भोले नाथ रे आज महोत्सव में मुख्य आकर्षण में ख्यातिलब्ध गायक जिन्होंने शिव भजनों  में आधुनिकता एवं पौराणिकता के तालमेल की एक नयी परम्परा का श्रृजन कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनायी है। महोत्सव में हंसराज रघुवंशी को सुनने आये लोगों के धैर्य की परीक्षा उनके मंच पर आते के बाद ही खत्म हुयी।

हंसराज रघुवंशी ने आज अपने भजन जय शिव शंकरसे ऐसा समा बांधा मानो आदि देव महादेव का प्राकट्य महोत्सव स्थल पर हो रहा हो।यह सिलसिला आगे भी शिव समा रहे है मुझमें ऐसा डमरू  बजा भोले नाथ ने सारा कैलास पर्वत मगन हो गया लागी मेरी तेरे संग लगी ओ मेरे नशंकर गाकर श्रोताओं को बांधे रखा।मेरा भोला है भण्डारी करे नंदी की सवारी भोले नाथ रे जब गाया लोग अपनी जगह पर झुमने लगे। हंसराज रघुवंशी ने अपना अंतिम भजन तब तक लोग अपनी जगह से टस से मस नहीं हुए।


आज व्यवस्था में सहयोग करने वालों में प्रमुख रूप से सर्वेश कुशवाहा,राम प्रकाश दुबे, अभिमन्यु सिंह,अखण्ड सिंह, उमेश दत्त पाठक, बब्बू उपाध्याय हरिवंश उपाध्याय जितेन्द्र पाण्डेय निकेतन मिश्र मंजीत सिंह जय प्रकाश पाण्डेय रामजी मौर्य शंशाक सिंह उपेन्द्र बाबा आदि उपस्थित रहे।

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