पक्षियों की प्यास बुझाने और आशियाना बचाने को आगे आया वाराणसी नगर निगम
वाराणसी। भीषण गर्मी और तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच बेजुबान पक्षियों के संरक्षण के लिए वाराणसी नगर निगम ने संवेदनशील पहल करते हुए शहरभर में 2,000 घोंसलों और 2,000 जलपात्रों का वितरण किया है। इस अभियान का उद्देश्य पक्षियों को सुरक्षित आश्रय और पेयजल उपलब्ध कराना तथा शहरी जैव विविधता को संरक्षित करना है।
कंक्रीट के बढ़ते जंगलों और घटते प्राकृतिक आवासों के कारण पक्षियों के सामने भोजन, पानी और आश्रय का संकट गहराता जा रहा है। ऐसे समय में नगर निगम द्वारा शुरू किया गया यह प्रकृति संरक्षण अभियान पर्यावरण के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का संदेश देता है।
अभियान के तहत शहर के पार्कों, सरकारी परिसरों, सार्वजनिक स्थलों और विभिन्न मोहल्लों में घोंसले एवं जलपात्र लगाए गए। भीषण गर्मी में पानी की तलाश में भटकने वाले पक्षियों के लिए यह व्यवस्था किसी जीवनदायिनी पहल से कम नहीं है। नगर निगम का मानना है कि यह प्रयास केवल तात्कालिक राहत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नागरिकों में प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति दीर्घकालिक जागरूकता और संवेदनशीलता विकसित करेगा।
पेड़ों की शाखाओं पर लटके घोंसले और जलपात्र अब शहर में पर्यावरण संरक्षण की नई तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं। इस अभियान में स्थानीय नागरिकों ने भी बढ़-चढ़कर सहभागिता दिखाई, जिससे पक्षी संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप मिलने की उम्मीद है।
नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण पक्षियों के प्राकृतिक आवास लगातार सिमट रहे हैं। ऐसे में नगर निगम का प्रयास है कि जिस प्रकार राहगीरों के लिए प्याऊ की व्यवस्था की जाती है, उसी प्रकार पक्षियों के लिए भी पानी और सुरक्षित आश्रय सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि घोंसले और जलपात्र केवल सुविधाएं नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलित सह-अस्तित्व का प्रतीक हैं। जनभागीदारी के माध्यम से ही पर्यावरण संरक्षण को व्यापक जन-आंदोलन का रूप दिया जा सकता है और काशीवासियों की सक्रिय भागीदारी इस दिशा में उत्साहजनक संकेत है।
