वाराणसी न्यायालय परिसर में एयर कंडीशनर, मेडिकल इमरजेंसी समेत आधारभूत सुविधाओं की मांग
वाराणसी। न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों एवं वादकारियों के लिए बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठी है। दी बनारस बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं भारतीय जनता पार्टी विधि प्रकोष्ठ, काशी क्षेत्र के संयोजक अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने इस संबंध में माननीय मुख्य न्यायाधीश,
इलाहाबाद उच्च न्यायालय, प्रशासनिक न्यायाधीश (वाराणसी), जनपद एवं सत्र न्यायाधीश वाराणसी, रजिस्ट्रार जनरल, इलाहाबाद उच्च न्यायालय तथा जिलाधिकारी वाराणसी को ई-मेल के माध्यम से विस्तृत प्रार्थना पत्र भेजा है।
प्रार्थना पत्र में हाल ही में वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद सिंह यादव के न्यायालय परिसर में विधिक कार्यवाही के दौरान अस्वस्थ होने के बाद हुए निधन का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि यह घटना न्यायालय परिसरों में स्वास्थ्य सुरक्षा और आधुनिक आधारभूत सुविधाओं की आवश्यकता को रेखांकित करती है। पत्र में कहा गया है कि भीषण गर्मी और उमस के बीच कई न्यायालय कक्षों में पर्याप्त शीतलन व्यवस्था, वेंटिलेशन और बैठने की समुचित सुविधा का अभाव अधिवक्ताओं तथा वादकारियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।
अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने मांग की है कि न्यायालय परिसर के सभी न्यायालय कक्षों में चरणबद्ध तरीके से एयर कंडीशनर लगाए जाएं। इसके साथ ही पर्याप्त बैठने की व्यवस्था, 24 घंटे मेडिकल इमरजेंसी कक्ष, ऑक्सीजन सिलेंडर, ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर (AED), स्ट्रेचर तथा प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने स्वच्छ एवं शीतल पेयजल, बेहतर वेंटिलेशन, वरिष्ठ एवं दिव्यांग अधिवक्ताओं के लिए विशेष बैठने की व्यवस्था तथा अधिवक्ताओं एवं न्यायालय कर्मचारियों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित किए जाने की भी मांग की है।
प्रार्थना पत्र में वरिष्ठ अधिवक्ता के निधन की घटना की प्रशासनिक समीक्षा कर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने का भी अनुरोध किया गया है।

शशांक शेखर त्रिपाठी ने कहा कि न्यायालय संविधान, न्याय और विधि के शासन का सर्वोच्च प्रतीक है। ऐसे में न्यायालय परिसर में कार्यरत अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों तथा न्याय की अपेक्षा लेकर आने वाले प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा, स्वास्थ्य और गरिमा सुनिश्चित करना न्याय व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने विश्वास जताया कि माननीय उच्च न्यायालय एवं जिला प्रशासन इस जनहित एवं अधिवक्ता हित से जुड़े विषय पर गंभीरता से विचार करते हुए आवश्यक निर्णय लेगा और न्यायालय परिसर की आधारभूत सुविधाओं को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
