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काशी में बादलों का तांडव! दो दिन बारिश का अलर्ट

काशी में बादलों का तांडव! दो दिन बारिश का अलर्ट
वाराणसी में मानसून मेहरबान, 55 दिन में पूरा हुआ 70 दिन का बारिश का कोटा

वाराणसी। काशी में इस बार मानसून सामान्य से देर से पहुंचने के बावजूद बारिश के आंकड़ों ने राहत की तस्वीर पेश की है। लगातार हुई बारिश के बाद वाराणसी में मानसून का निर्धारित वर्षा कोटा पूरा हो गया है। 70 दिनों के मानसूनी औसत के मुकाबले इस बार महज 55 दिनों में ही 577.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जा चुकी है। सोमवार को हुई मूसलाधार बारिश के बाद वर्षा की कमी तीन प्रतिशत रह गई थी, जो मंगलवार को हुई 17.6 मिलीमीटर बारिश के बाद पूरी तरह समाप्त हो गई।

इस बार मानसून ने काशी में एक जुलाई को दस्तक दी थी, जबकि सामान्य तौर पर यहां मानसून का आगमन 20 जून तक हो जाता है। इसके बावजूद पिछले दो दिनों में हुई अच्छी बारिश ने वर्षा के आंकड़ों को औसत के स्तर पर पहुंचा दिया। सोमवार को वाराणसी में करीब 160 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। इसके बाद मंगलवार की बारिश ने वर्षा घाटे को शून्य पर पहुंचा दिया।

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बारिश का आंकड़ा भले ही संतुलित हो गया हो, लेकिन इसका वास्तविक लाभ अपेक्षित रूप से नहीं मिला। कम समय में हुई अत्यधिक बारिश का बड़ा हिस्सा पानी के तेज बहाव के साथ निकल गया। अचानक हुई मूसलाधार बारिश को मौसम की असामान्य स्थिति माना जा रहा है। ऐसे में कुल वर्षा का आंकड़ा सामान्य दिखने के बावजूद भूजल recharge और जल संचयन के लिहाज से स्थिति उतनी बेहतर नहीं मानी जा रही है।

बुधवार को नहीं हुई बारिश, बढ़ी उमस

बुधवार को बारिश का अलर्ट और पूर्वानुमान जारी होने के बावजूद काशी में बारिश नहीं हुई। दिन में धूप निकलने के कारण गर्मी और उमस बढ़ गई। मंगलवार की तुलना में अधिकतम तापमान करीब दो डिग्री बढ़कर 34 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान 25.1 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि हवा की रफ्तार करीब 11 किलोमीटर प्रति घंटे रही।

अगले दो दिन बारिश की संभावना

यूपी आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डॉ. अतुल कुमार सिंह के अनुसार, अगले दो दिनों तक मौसम में इसी तरह उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। मानसून की ट्रफ लाइन काशी के ऊपर से गुजर रही है, जिसके कारण बारिश की परिस्थितियां बनी हुई हैं। अगले एक दिन गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है।

निष्कर्ष: वाराणसी में मानसून का वर्षा घाटा अब शून्य हो गया है और 70 दिनों के औसत के बराबर 577.2 मिलीमीटर बारिश महज 55 दिनों में दर्ज हो चुकी है। हालांकि, कम समय में हुई तेज बारिश के कारण जल संरक्षण और भूजल recharge के लिहाज से इसका लाभ सीमित रहने की बात मौसम विशेषज्ञ बता रहे हैं।

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