काशी में बकरा मंडी पर प्रशासन का ताला, ईद से पहले हजारों व्यापारियों और किसानों पर रोजी-रोटी का संकट
बेनिया बकरा मंडी बंद होने से कारोबार ठप, पुलिस तैनात; व्यापारियों ने फैसले पर उठाए सवाल
वाराणसी। ईद-उल-अज़हा से ठीक पहले वाराणसी की चर्चित बेनिया बकरा मंडी पर नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रशासन की कार्रवाई ने हजारों व्यापारियों, किसानों, पशुपालकों और मजदूरों की चिंता बढ़ा दी है। सोमवार को प्रशासनिक टीम ने मंडी को खाली कराते हुए मुख्य गेट पर सरकारी ताला जड़ दिया। कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और वर्षों से संचालित बकरा कारोबार अचानक ठप हो गया।
प्रशासन की इस कार्रवाई से सबसे अधिक असर उन व्यापारियों और किसानों पर पड़ा है, जो दूर-दराज़ जिलों और गांवों से बकरे लेकर वाराणसी पहुंचे थे। ईद-उल-अज़हा के मौके पर बेनिया मंडी को शहर की सबसे बड़ी बकरा मंडियों में गिना जाता है, जहां हर दिन सैकड़ों पशुओं की खरीद-फरोख्त होती थी।
18 मई से मिली थी अनुमति, फिर अचानक रद्द हुआ आवंटन
जानकारी के अनुसार, बेनिया बकरा मंडी का संचालन साजिद खान द्वारा कराया जा रहा था। मंडी संचालन की अनुमति 18 मई से 27 मई तक दी गई थी। लेकिन अचानक शनिवार को स्मार्ट सिटी प्रशासन ने मंडी का आवंटन निरस्त कर दिया। इसके बाद सोमवार सुबह नगर आयुक्त के निर्देश पर नगर निगम, प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और पूरी मंडी खाली कराकर गेट पर ताला लगा दिया।
कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात रहा। किसी प्रकार के विरोध या तनाव की स्थिति से निपटने के लिए पुलिस लगातार निगरानी करती रही।
रोजाना करोड़ों का कारोबार होता था
व्यापारियों का कहना है कि बेनिया बकरा मंडी सिर्फ एक बाजार नहीं बल्कि हजारों लोगों की आजीविका का मुख्य केंद्र थी। उनका दावा है कि यहां प्रतिदिन लगभग 700 से 800 बकरों की खरीद-फरोख्त होती थी और करोड़ों रुपये का कारोबार होता था।
व्यापारियों और पशुपालकों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बिना पूर्व सूचना और बिना वैकल्पिक व्यवस्था के मंडी बंद कर दी, जिससे उनका भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। कई लोगों का कहना है कि उन्होंने त्योहार को देखते हुए लाखों रुपये निवेश किए थे, लेकिन अब मंडी बंद होने से उनकी पूंजी फंस गई है।
किसानों और पशुपालकों में नाराजगी
दूर-दराज़ क्षेत्रों से आए किसानों ने बताया कि वे कई दिनों की यात्रा और खर्च के बाद बकरे लेकर वाराणसी पहुंचे थे। अचानक मंडी बंद होने से अब उनके सामने पशुओं को वापस ले जाने की समस्या खड़ी हो गई है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द किसी वैकल्पिक स्थान पर मंडी लगाने की व्यवस्था की जाए, ताकि उनका व्यापार प्रभावित न हो। उनका कहना है कि ईद के पहले मंडी बंद होने से उन्हें भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
मुस्लिम समुदाय ने भी जताई नाराजगी
मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि त्योहार से ठीक पहले मंडी बंद करना व्यापारियों और पशुपालकों के लिए बड़ा झटका है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी रही कि यह कार्रवाई कथित तौर पर एक शिकायत के बाद की गई है, हालांकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
असमंजस में व्यापारी, प्रशासन से पुनर्विचार की मांग
फिलहाल मंडी बंद होने से व्यापारियों और पशुपालकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। प्रभावित लोगों ने प्रशासन से फैसले पर पुनर्विचार करने या तत्काल दूसरी जगह मंडी की व्यवस्था करने की मांग की है।
व्यापारियों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी और उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ेगा।
