×

शंखनाद और दीपों की रोशनी से जगमगाई काशी, गंगा आरती में उमड़े हजारों श्रद्धालु

शंखनाद और दीपों की रोशनी से जगमगाई काशी, गंगा आरती में उमड़े हजारों श्रद्धालु
काशी की शाम हुई भक्तिमय, गंगा आरती में दिखा आस्था का विराट रूप
 

वाराणसी। धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में शनिवार सायंकाल विश्व प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट पर आयोजित मां गंगा की भव्य संध्या आरती के दौरान श्रद्धालुओं और पर्यटकों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। देश-विदेश से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने मां गंगा की आराधना कर सुख, समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की।

सूर्यास्त के साथ ही दशाश्वमेध घाट का वातावरण शंखनाद, वैदिक मंत्रोच्चार और घंटियों की मधुर ध्वनि से भक्तिमय हो उठा। पारंपरिक सफेद एवं भगवा वस्त्रों से सुसज्जित आचार्यों ने विधि-विधान से मां गंगा की आरती संपन्न कराई। बहुस्तरीय दीपदान, धूप, शंख और अग्नि की लहराती आरती ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक भाव-विभोर कर दिया।

गंगा तट पर दीपों की स्वर्णिम आभा और मां गंगा की लहरों का मनमोहक दृश्य श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। आरती के दौरान श्रद्धालु भक्ति में लीन दिखाई दिए और कई पर्यटक इस अद्भुत दृश्य को अपने कैमरों में कैद करते नजर आए।

देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र

दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती आज केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह काशी की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक पहचान बन चुकी है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु और विदेशी पर्यटक इस दिव्य आयोजन के साक्षी बनने के लिए यहां पहुंचते हैं। पर्यटन विशेषज्ञों के अनुसार गंगा आरती वाराणसी के प्रमुख आध्यात्मिक और पर्यटन आकर्षणों में शामिल है।

सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां गंगा को मोक्षदायिनी तथा पापों का नाश करने वाली माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि गंगा आरती में सम्मिलित होकर मां गंगा का दर्शन एवं पूजन करने से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक संतोष की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि काशी की यह विश्व प्रसिद्ध आरती भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक मानी जाती है।

काशी की वैश्विक पहचान बनी गंगा आरती

दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती आज विश्व पटल पर काशी की पहचान के रूप में स्थापित हो चुकी है। सप्ताहांत, पर्व एवं विशेष अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। हर शाम गंगा तट पर श्रद्धा, भक्ति और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है, जो काशी की आध्यात्मिक गरिमा को और भी अधिक प्रतिष्ठित करता है।

Share this story