काशी में प्रवाहित हुई घरानों की सुर सरिता
काशी में प्रवाहित हुई घरानों की सुर सरिता

वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ धाम यात्रा के अन्तर्गत संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी लखनऊ, धर्मार्थ कार्य विभाग, संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश सरकार एवं जिला प्रशासन वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित त्रिदिवसीय राग रंग कार्यक्रम का दिनांक 07.01.2022 को समापन हुआ। पद्मविभूषण गिरिजा देवी सांस्कृतिक संकुल में शास्त्रीय संगीत घराना समागम के अन्तिम दिन सभागार सुर लय ताल की नाल यात्रा का साक्षी बना।

काशी में प्रवाहित हुई घरानों की सुर सरिता

कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रसिद्ध वायलिन वादक विदुषी कलारामनाथ और शहनाई वादक पंडित राजेन्द्र प्रसन्ना की युगलवन्दी से हुआ। इन्होंने राग मधुवंती से अपनी प्रस्तुति प्रारम्भ किया। इनके साथ तबले पर पं मिथिलेश जा, दुक्कड पर मंगल प्रसाद तथा शहनाई पर श्री विकास बाबू ने संगत किया।

तत्पश्चात मंच संभाला रामपुर सहसवान घराने के प्रसिद्ध गायक पद्मश्री राशिद खान ने राग पूरिया धनाश्री में निलम्बित एक ताल अब तो रूम मान और छोटे ख्याल में पायलिया झनकार मोरी और अन्त में राग यमन में भजन प्रस्तुत किया। इनके साथ तबले पर पं रामकुमार मिश्रा, सारंगी पर मुराद अली खान, हारमोनियम पर डॉ विनय मिश्रा तथा सहगायन में अरमान खां ने सहयोग किया।

काशी में प्रवाहित हुई घरानों की सुर सरिता

अन्तिम प्रस्तुति विख्यात सितारवादक पंडित निलाद्री कुमार की रही। इन्होंने राग तिलक कामोद में मसीदखानी गत का वादन किया तत्पश्चात राग नटतिलक में बन्दिश बजाया और अन्त में अपनी प्रस्तुति का समापन उन्होंने राग भैरवी धुन वादन कर किया।उनके साथ तबले पर संगत किया श्री सत्यजीत तलवरकर ने सहयोग किया।

अतिथियों का स्वागत पद्मश्री डॉ राजेश्वर आचार्य के किया। कार्यक्रम का संयोजन प्रभारी क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र वाराणसी डॉ सुभाष चन्द्र यादव एव उ० प्र० संगीत नाटक अकादमी के सचिव श्री तरूण राज तथा संचालन सौरभ चकने किया। इस अवसर पर संकटमोचन दरबार के महन्त प्रोफेसर विशम्भरनाथ मिश्र,, डॉ लवकुश द्विवेदी, आदि बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम के संयोजन में श्री अखिलेश यादव, प्रशान्त यादव, प्रशान्त राय, अभिषेक राय, अंगिका मिश्रा, श्रुति प्रकाश, अतुल कुमार, शिवम आदि ने सहयोग प्रदान किया।

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