काशी नरेश ने दोनों युवराजों के साथ किया राजा तालाब रथ यात्रा मेले का शुभारंभ, बना ऐतिहासिक पल...
वाराणसी। काशी की सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक राजा तालाब रथ यात्रा मेले का रविवार को पारंपरिक वैदिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य शुभारंभ हुआ।
इस अवसर पर काशी नरेश महाराज डॉ. अनंत नारायण सिंह अपने दोनों पुत्र कुंवर अनिरुद्ध नारायण सिंह और कुंवर प्रद्युम्न नारायण सिंह के साथ मेले में शामिल हुए।
इस वर्ष का आयोजन ऐतिहासिक दृष्टि से विशेष रहा। बताया जा रहा है कि काशी राज के इतिहास में पहली बार वर्तमान काशी नरेश अपने दोनों युवराजों के साथ राजा तालाब की ऐतिहासिक रथ यात्रा में शामिल हुए।

इसे राजपरंपरा की निरंतरता और नई पीढ़ी को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
'हर-हर महादेव' के जयघोष से गूंजा पूरा क्षेत्र
काशी नरेश के आगमन पर क्षेत्रवासियों ने "हर-हर महादेव" के उद्घोष के साथ उनका जोरदार स्वागत किया। इस दौरान क्षेत्र के परंपरागत रईसान परिवारों और गणमान्य नागरिकों ने राजदरबार में पहुंचकर महाराज का अभिनंदन किया।

डीह गंजारी, कुरौना, मोतीकोट, खोचवां, जख्खिनी, नरसडड़ा, वीरभानपुर, दिनदासपुर और जलालपुर सहित कई प्रतिष्ठित परिवारों ने इस आयोजन में भाग लिया। इन परिवारों का काशी राज से पीढ़ियों पुराना संबंध रहा है और वे वर्षों से रथ यात्रा की परंपरा का निर्वहन करते आ रहे हैं।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच खींचा ठाकुर जी का रथ
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच काशी नरेश ने ठाकुर जी के रथ को खींचकर मेले का विधिवत शुभारंभ किया। इसके बाद परंपरा के अनुसार वे अपने दोनों युवराजों के साथ हाथी पर सवार होकर राजा तालाब से श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, भैरव तालाब तक निकली भव्य शोभायात्रा में शामिल हुए।

पूरे मार्ग पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। लोगों ने "हर-हर महादेव" के जयघोष के साथ काशी नरेश और दोनों युवराजों का स्वागत किया। धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और राजपरंपरा के अद्भुत संगम ने इस ऐतिहासिक रथ यात्रा को और भी भव्य बना दिया।
रथ यात्रा मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, स्थानीय नागरिक और विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य लोग शामिल हुए। श्रद्धा, आस्था और परंपरा से परिपूर्ण यह आयोजन शांतिपूर्ण एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।
