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BHU में अत्याधुनिक LC-MS लैब का उद्घाटन, मरीजों को मिलेगी उन्नत जांच सुविधा

BHU में अत्याधुनिक LC-MS लैब का उद्घाटन, मरीजों को मिलेगी उन्नत जांच सुविधा

वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (IMS) में चिकित्सा अनुसंधान और आधुनिक जांच सुविधाओं को नई मजबूती मिली है। संस्थान के जैव रसायन विभाग में सोमवार को अत्याधुनिक लिक्विड क्रोमैटोग्राफी–मास स्पेक्ट्रोमेट्री (LC-MS) प्रयोगशाला का उद्घाटन किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने इस आधुनिक सुविधा का शुभारंभ किया। इस प्रयोगशाला की स्थापना को गंभीर बीमारियों की पहचान, उन्नत चिकित्सा अनुसंधान और मरीजों को बेहतर जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

जटिल बीमारियों की पहचान में कारगर होगी LC-MS तकनीक

LC-MS दो अत्याधुनिक विश्लेषणात्मक तकनीकों का संयुक्त स्वरूप है। इसमें लिक्विड क्रोमैटोग्राफी के माध्यम से किसी जटिल मिश्रण में मौजूद विभिन्न अणुओं को अलग किया जाता है, जबकि मास स्पेक्ट्रोमेट्री के जरिए उनकी पहचान और मात्रा का सटीक विश्लेषण किया जाता है। इस तकनीक की मदद से जैव रसायन, आणविक जीव विज्ञान, मेटाबोलॉमिक्स, प्रोटीओमिक्स, औषधि विज्ञान और बायोमेडिकल रिसर्च के क्षेत्र में उन्नत अध्ययन को बढ़ावा मिलेगा।

पूर्वांचल के मरीजों को मिलेगी उन्नत जांच की सुविधा

नई LC-MS सुविधा का लाभ सर सुंदरलाल अस्पताल में उपचार कराने वाले मरीजों को भी मिलने की उम्मीद है। इसके माध्यम से नवजात शिशुओं और बच्चों में जन्मजात मेटाबॉलिक एवं आनुवंशिक विकारों की पहचान में सहायता मिलेगी। इसके अलावा विटामिन, हार्मोन और अमीनो एसिड की सटीक जांच के साथ मरीजों के शरीर में दवाओं के स्तर की निगरानी भी की जा सकेगी।

इस तकनीक से चिकित्सकों को मरीजों की बीमारी और शारीरिक जरूरतों के अनुरूप उपचार निर्धारित करने में मदद मिलेगी। इससे पूर्वांचल के साथ बिहार और आसपास के राज्यों से BHU आने वाले मरीजों को भी उन्नत जांच सुविधाओं का लाभ मिलने की संभावना है।

कुलपति ने अनुसंधान और बेहतर चिकित्सा सेवाओं पर दिया जोर

उद्घाटन समारोह में कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि चिकित्सा अनुसंधान और मरीजों की बेहतर देखभाल एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। अनुसंधान के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए मरीजों को दी जाने वाली चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार आवश्यक है। वहीं, बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के विकास के लिए अनुसंधान को लगातार मजबूत करना होगा।

IMS के निदेशक प्रो. एस.एन. शंखवार ने LC-MS प्रयोगशाला को संस्थान की अनुसंधान संबंधी आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। संकाय प्रमुख प्रो. संजय गुप्ता ने कहा कि संस्थान आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और अनुसंधान के संसाधनों को विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है।

जैव रसायन विभाग के वरिष्ठ आचार्य प्रो. देबब्रत दास ने बताया कि इस अत्याधुनिक सुविधा का उपयोग केवल जैव रसायन विभाग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि IMS के सभी विभाग इसका लाभ उठा सकेंगे। विभागाध्यक्ष प्रो. कमलेश एम. पलांडुरकर ने LC-MS तकनीक की कार्यप्रणाली और चिकित्सा अनुसंधान में इसके वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के अंत में क्लिनिकल इन्वेस्टिगेशन केंद्र के प्रभारी प्रो. एस.पी. मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शुभम और डॉ. संदीप कौर ने किया। इस अवसर पर प्रो. नीरज, डॉ. रागिनी, डॉ. ज्योत्सना, डॉ. अभीजीत, कार्डियोलॉजी विभाग के डॉ. सौमिक घोष सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

BHU में इस अत्याधुनिक प्रयोगशाला की शुरुआत से चिकित्सा अनुसंधान को नई दिशा मिलने के साथ ही मरीजों की जटिल बीमारियों की जांच और उपचार संबंधी निर्णयों में वैज्ञानिक सटीकता बढ़ाने की उम्मीद है।

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