रोपवे की रफ्तार से पहले सुरक्षा की परीक्षा, रथयात्रा से गिरजाघर तक ट्रायल शुरू
वाराणसी। काशी में निर्माणाधीन अर्बन ट्रांसपोर्ट रोपवे परियोजना को यात्री संचालन के लिए तैयार करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। सावन के दौरान मंगलवार से रथयात्रा से गिरजाघर के बीच रोपवे का टेस्टिंग ट्रायल शुरू कर दिया गया। रोप डालने के बाद गंडोलों का संचालन कर विभिन्न तकनीकी और सुरक्षा मानकों की जांच की जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, रोपवे के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करने के लिए लोड टेस्टिंग समेत कई स्तरों पर परीक्षण किया जाएगा। परीक्षण के दौरान निर्माण और तकनीकी व्यवस्था से जुड़ी किसी भी कमी या खामी के सामने आने पर उसे तत्काल दूर किया जाएगा। परियोजना को यात्री संचालन के लिए तभी आगे बढ़ाया जाएगा, जब सभी निर्धारित सुरक्षा मानकों पर व्यवस्था पूरी तरह खरी उतरेगी।
कई चरणों में दोहराया जाएगा परीक्षण
रोपवे की टेस्टिंग केवल एक बार की प्रक्रिया नहीं है। सुरक्षा की दृष्टि से परीक्षण को कम से कम चार बार दोहराया जाता है। इसका उद्देश्य रोप, टावर, गंडोला, स्टेशन और अन्य तकनीकी प्रणालियों की क्षमता एवं कार्यप्रणाली की विस्तृत जांच करना है। बार-बार परीक्षण के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि भविष्य में संचालन के दौरान तकनीकी समस्या की आशंका न्यूनतम रहे।
880 किलो भार के साथ होगा परीक्षण
लोड टेस्टिंग के दौरान प्रत्येक गंडोले की क्षमता की भी जांच की जाएगी। इसके लिए एक गंडोले में 10 यात्रियों के बराबर लगभग 800 किलोग्राम भार को आधार बनाया गया है। इसके अतिरिक्त 10 प्रतिशत अतिरिक्त भार शामिल करते हुए कुल करीब 880 किलोग्राम भार के साथ परीक्षण किया जाएगा।
इस प्रक्रिया से यह परखा जाएगा कि निर्धारित यात्री भार और अतिरिक्त भार की स्थिति में गंडोला, रोप और संबंधित तकनीकी प्रणाली किस तरह काम करती है। परीक्षण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, संचालन क्षमता और तकनीकी मानकों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।
3.8 किलोमीटर लंबा होगा रोपवे मार्ग
काशी में प्रस्तावित रोपवे परियोजना की कुल लंबाई करीब 3.8 किलोमीटर है। इस मार्ग पर कैंट स्टेशन से गोदौलिया तक यात्रियों को रोपवे के माध्यम से पहुंचाने की योजना है। मार्ग में काशी विद्यापीठ और रथयात्रा इंटरमीडिएट स्टेशन होंगे, जबकि गिरजाघर को तकनीकी स्टेशन के रूप में विकसित किया गया है।
परियोजना में कुल पांच स्टेशन और 29 टावर शामिल हैं। इन टावरों के सहारे रोपवे प्रणाली का संचालन किया जाएगा।
यात्री संचालन से पहले सुरक्षा पर जोर
रोपवे परियोजना के संचालन से पहले सुरक्षा मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। टेस्टिंग ट्रायल के दौरान तकनीकी प्रणाली की क्षमता, गंडोलों की आवाजाही और भार वहन क्षमता समेत विभिन्न पहलुओं की जांच की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि परीक्षण प्रक्रिया पूरी होने और सभी जरूरी मानकों के संतोषजनक पाए जाने के बाद ही इसे यात्रियों के लिए शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा।
काशी में यह परियोजना शहरी परिवहन व्यवस्था को नया विकल्प देने के साथ-साथ कैंट से गोदौलिया के बीच आवागमन को सुगम बनाने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
