शिक्षक दिवस पर संस्कृत विश्वविद्यालय में सेवानिवृत्त आचार्य का सम्मान
वाराणसी। शिक्षक दिवस के अवसर पर सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी में विशेष समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में इस वर्ष सेवानिवृत्त होने वाले न्यायशास्त्र के वरिष्ठ आचार्य एवं पूर्व दर्शन संकाय प्रमुख प्रो. रामपूजन पाण्डेय का विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने सम्मान एवं अभिनंदन किया। कुलपति ने माल्यार्पण, तिलक, अंगवस्त्र और रजतयुक्त स्मृतिचिह्न प्रदान कर उनके दीर्घ शैक्षणिक एवं सारस्वत योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि भारतीय परम्परा में शिक्षक का स्थान अत्यंत सम्माननीय रहा है। शिक्षक केवल विद्यार्थियों को ज्ञान देने का कार्य नहीं करता, बल्कि उनके व्यक्तित्व, संस्कार, चरित्र और जीवन-दृष्टि का निर्माण भी करता है। उन्होंने कहा कि “आचार्य केवल ज्ञानदाता नहीं, संस्कार और चरित्र के शिल्पी हैं।”
शिक्षक का आचरण ही सबसे प्रभावी पाठशाला
कुलपति ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा में आचार्य की भूमिका केवल अध्यापन तक सीमित नहीं रही है। विद्या, विनय, विवेक, सत्य, संयम, करुणा, धैर्य, आचार, प्रज्ञा और लोकमंगल जैसे गुणों का समन्वय ही एक शिक्षक को सच्चा आचार्य बनाता है।
उन्होंने आचार्य यास्क की परम्परा का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘आचार्य’ वह है जो आचार को ग्रहण कराता है। इसलिए शिक्षक का अपना आचरण विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ी पाठशाला होता है। विद्यार्थी पुस्तकों से ज्ञान प्राप्त करता है, लेकिन गुरु के व्यवहार, अनुशासन, संवेदनशीलता और जीवन-मूल्यों से जीवन जीने की कला सीखता है।
डॉ. राधाकृष्णन को किया याद
शिक्षक दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कुलपति ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को भी स्मरण किया। उन्होंने कहा कि डॉ. राधाकृष्णन भारतीय शिक्षा, दर्शन और संस्कृति के प्रति समर्पण के प्रतीक थे। महान दार्शनिक एवं शिक्षाविद् के साथ-साथ वे देश के प्रथम उपराष्ट्रपति और द्वितीय राष्ट्रपति रहे।
कुलपति ने कहा कि शिक्षक दिवस उनके प्रति कृतज्ञ राष्ट्र की श्रद्धांजलि का प्रतीक है और इस दिन शिक्षकों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त करना हमारी पवित्र परम्परा का हिस्सा है।
सेवानिवृत्ति नहीं, ज्ञान-साधना की नई पारी
प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने प्रो. रामपूजन पाण्डेय के लंबे शैक्षणिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि सेवानिवृत्ति सेवा का अंत नहीं, बल्कि अनुभव और ज्ञान को समाज के व्यापक हित में समर्पित करने का नया अवसर है। उन्होंने प्रो. पाण्डेय के स्वस्थ, सुखी, दीर्घ एवं सक्रिय जीवन की मंगलकामना की।
उन्होंने कहा कि आचार्यों ने अपनी सारस्वत साधना को राष्ट्रनिर्माण की साधना में परिवर्तित किया है। किसी शिक्षक की वास्तविक उपलब्धि उसके पद या सम्मान में नहीं, बल्कि उसके शिष्यों के जीवन में दिखाई देने वाले ज्ञान, संस्कार, चरित्र और सफलता में होती है।
विश्वविद्यालय के विकास और केंद्रीय दर्जे की मांग
सम्मानित किए गए सेवानिवृत्त वरिष्ठ आचार्य एवं न्यायशास्त्र के विद्वान प्रो. रामपूजन पाण्डेय ने कहा कि भारतीय संस्कृति में शिक्षक को अत्यंत सम्मानजनक स्थान प्राप्त है और आचार्यों को देवरूप में माना गया है।
उन्होंने कहा कि सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय देववाणी संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से स्थापित महत्वपूर्ण संस्था है। यहां के आचार्यों ने भारतीय ज्ञान परम्परा, संस्कृति और शास्त्रीय शिक्षा के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
प्रो. पाण्डेय ने कहा कि उन्होंने इस संस्था में तीन दशक से अधिक समय तक सेवा की है। उन्होंने विश्वविद्यालय के उन्नयन, उचित संरक्षण और इसके लिए केंद्रीय दर्जा दिए जाने की दिशा में प्रयास किए जाने का अनुरोध भी किया।

शिक्षकों का भी किया गया अभिनंदन
समारोह के दौरान कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने उपस्थित सभी अध्यापकों का परंपरानुसार माल्यार्पण कर अभिनंदन किया। मंचासीन अतिथियों का भी स्वागत एवं सम्मान किया गया।
वैदिक एवं वेदान्त विभागाध्यक्ष आचार्य सुधाकर मिश्र ने शिक्षक दिवस की महत्ता एवं वेदों में शिक्षक परम्परा के महत्व पर प्रकाश डाला। न्यायशास्त्र के अध्यापक डॉ. दुर्गेश पाठक ने कहा कि शिक्षक समाज का दर्पण होने के साथ-साथ अपने आचरण के माध्यम से समाज और विद्यार्थियों का निर्माता भी होता है।
मंगलाचरण से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण से हुआ। डॉ. विजय कुमार शर्मा ने वैदिक मंगलाचरण तथा नितीश ठाकुर ने पौराणिक मंगलाचरण प्रस्तुत किया। इसके बाद मंचासीन अतिथियों ने दीप प्रज्वलन किया तथा मां सरस्वती और डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण किया।
विज्ञान विभागाध्यक्ष एवं कुलानुशासक प्रो. जितेन्द्र कुमार ने वाचिक स्वागत एवं अभिनंदन किया। कार्यक्रम का संयोजन प्रो. जितेन्द्र कुमार ने किया, जबकि ज्योतिष शास्त्र के सहायक आचार्य डॉ. मधुसूदन मिश्र ने संचालन किया।
समारोह के अंत में ज्योतिष शास्त्र के विभागाध्यक्ष आचार्य एवं प्रो. अमित कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया। विश्वविद्यालय परिवार की ओर से “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः...” का शांति पाठ किया गया।
ये रहे प्रमुख उपस्थित लोग
समारोह में प्रो. जितेन्द्र कुमार, प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल, प्रो. सुधाकर मिश्र, प्रो. रमेश प्रसाद, प्रो. राजनाथ, प्रो. महेन्द्र पांडेय, प्रो. विजय कुमार पाण्डेय, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, प्रो. विद्या कुमारी चंद्रा, डॉ. विजेन्द्र कुमार आर्य, डॉ. विजय कुमार शर्मा, डॉ. दुर्गेश पाठक, डॉ. सत्येन्द्र कुमार, डॉ. विल्वेश कुप्पा, डॉ. रानी द्विवेदी, डॉ. उमापति उपाध्याय सहित विश्वविद्यालय के अनेक आचार्य एवं शिक्षक उपस्थित रहे।
