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काशी में डोली यात्रा से शुरू हुआ रथयात्रा महोत्सव, 'जय जगन्नाथ' के जयघोष से गूंजा शहर

 काशी में डोली यात्रा से शुरू हुआ रथयात्रा महोत्सव, 'जय जगन्नाथ' के जयघोष से गूंजा शहर
 224 वर्ष पुरानी परंपरा निभी, डोली यात्रा के साथ काशी में रथयात्रा महोत्सव का आगाज़

वाराणसी। धर्मनगरी काशी में भगवान जगन्नाथ के स्वस्थ होने के उपरांत बुधवार को पारंपरिक डोली यात्रा श्रद्धा, आस्था और उल्लास के वातावरण में निकाली गई। अस्सी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर से प्रारंभ हुई इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ सुसज्जित डोली में नगर भ्रमण पर निकले। यात्रा मार्ग पर "जय जगन्नाथ" और "हर-हर महादेव" के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

डमरू की गूंज, धर्मध्वजों, भजन-कीर्तन और शंखनाद के बीच निकली इस पारंपरिक यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया तथा द्वारकाधीश मंदिर सहित कई प्रमुख स्थलों पर आरती कर मंगलकामना की।

भगवान जगन्नाथ मंदिर से जुड़े भक्त गोविंद शर्मा ने बताया कि काशी में डोली यात्रा की परंपरा लगभग 224 वर्ष पुरानी है। वर्षभर श्रद्धालु इस अवसर की प्रतीक्षा करते हैं और भगवान की डोली उठाने को अपना सौभाग्य मानते हैं।

आज से शुरू होगा तीन दिवसीय रथयात्रा मेला

गुरुवार से काशी के ऐतिहासिक तीन दिवसीय रथयात्रा मेले का शुभारंभ होगा। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र भव्य रथ पर विराजमान होकर श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। मान्यता है कि इसी अवसर पर भगवान मंदिर के गर्भगृह से बाहर निकलकर अपने भक्तों के बीच आते हैं और सभी को दर्शन का सौभाग्य प्रदान करते हैं।

लाखों श्रद्धालुओं की उमड़ती है आस्था

काशी का रथयात्रा मेला शहर के प्रमुख लक्खा मेलों में शामिल है, जिसमें हर वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। परंपरा के अनुसार श्रद्धालु भगवान को तुलसी और नानखटाई का भोग अर्पित करते हैं। वहीं इस वर्ष पहली बार जगन्नाथ पुरी की परंपरा के अनुरूप भगवान जगन्नाथ को खाजा का विशेष भोग भी अर्पित किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।

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