पांचवें दिन भी नहीं टूटा रंजीत यादव का धरना, मूल अभिलेख और पर्यवेक्षक की रिपोर्ट देने की मांग
वाराणसी। वाराणसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र-2026 के स्वतंत्र प्रत्याशी रंजीत कुमार यादव ‘माधव’ का नामांकन निरस्तीकरण के विरोध में शास्त्री घाट स्थित अधिकृत धरना स्थल पर जारी आमरण अनशन एवं अनिश्चितकालीन धरना सोमवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। रंजीत यादव ने संबंधित अधिकारियों की ओर से अब तक ठोस पहल नहीं किए जाने पर नाराजगी जताते हुए निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
रंजीत यादव ‘माधव’ ने आरोप लगाया कि नामांकन निरस्तीकरण के मामले में न्याय की मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रहे आंदोलनकारियों को पुलिस बल के जरिए हटाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि एक ओर उनकी शिकायतों पर सुनवाई नहीं हो रही है, वहीं दूसरी ओर धरना समाप्त करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार से जुड़ा गंभीर विषय बताया।
उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। नामांकन निरस्तीकरण से संबंधित शिकायतों पर स्पष्ट जवाब नहीं मिलने के कारण स्थिति बनी हुई है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से नामांकन निरस्तीकरण के कारणों की जानकारी देने और उससे जुड़े दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की।
रंजीत यादव ने विशेष रूप से नामांकन से संबंधित मूल अभिलेखों को सुरक्षित रखने, पर्यवेक्षक की रिपोर्ट उपलब्ध कराने और निरस्तीकरण के आधार स्पष्ट करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े किसी भी विवाद का समाधान नियमानुसार और निष्पक्ष जांच के माध्यम से किया जाना चाहिए, ताकि तथ्यों की स्पष्टता सामने आ सके।
उन्होंने प्रशासन और निर्वाचन अधिकारियों से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने तथा संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने की अपील की। साथ ही, धरना स्थल पर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे लोगों के अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित करने की मांग भी की।
रंजीत यादव ‘माधव’ ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर नियमानुसार सुनवाई नहीं होती और प्रकरण में पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक उनका लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने आम नागरिकों, छात्रों और युवाओं से इस मुद्दे पर शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से समर्थन देने की अपील की।
