कबीरचौरा अस्पताल में समय से पहले बंद हुई ओपीडी, इलाज के बिना लौटे सैकड़ों मरीज
जानकारी के अनुसार शनिवार को अस्पताल की ओपीडी में करीब 1000 मरीजों ने पंजीकरण कराया था। बावजूद इसके ईएनटी, स्किन समेत कई विभागों के डॉक्टरों ने दोपहर एक बजे से पहले ही अपने चैंबर बंद कर दिए। मरीजों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन की ओर से न तो कोई सूचना जारी की गई और न ही रजिस्ट्रेशन काउंटर पर कोई नोटिस लगाया गया। कई मरीज निजी अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर हुए।
मरीजों ने कुछ डॉक्टरों पर अभद्र व्यवहार करने का भी आरोप लगाया। सिगरा निवासी विकास सिंह ने बताया कि कान में संक्रमण और सुनने की समस्या होने के बावजूद डॉक्टर ने उनकी बात ठीक से सुने बिना दवाएं लिख दीं। वहीं गोदौलिया निवासी अंकित यादव ने आरोप लगाया कि एलर्जी की शिकायत लेकर पहुंचे तो डॉक्टर ने चैंबर के बाहर खड़े-खड़े ही दवा लिख दी और शिकायत करने पर नाराजगी जताई।
अस्पताल में स्किन विभाग की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं। मरीजों का कहना है कि एक निजी मेडिकल संचालक का करीबी व्यक्ति विभाग की व्यवस्था संभालता है और डॉक्टरों द्वारा विशेष मेडिकल स्टोर की दवाएं लिखी जाती हैं। इससे अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामले को गंभीरता से लेते हुए एसआईसी डॉ. बृजेश कुमार ने कहा कि ओपीडी का समय दोपहर 2 बजे तक निर्धारित है। समय से पहले चैंबर बंद करने वाले डॉक्टरों से जवाब तलब किया जाएगा। मरीजों से अभद्रता के आरोपों की भी जांच कर संबंधित चिकित्सकों को नोटिस जारी किया जाएगा।
वहीं स्वास्थ्य विभाग के अपर निदेशक डॉ. एनडी शर्मा ने कहा कि मरीजों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना सभी डॉक्टरों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी है। ओपीडी समय से पहले बंद होने के मामले में अस्पताल प्रशासन से रिपोर्ट मांगी गई है और जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
