काशी में सावन के पहले सोमवार पर आस्था का सैलाब, कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा, हर-हर महादेव से गूंजा विश्वनाथ धाम
वाराणसी। सावन के पहले सोमवार पर धर्मनगरी काशी शिवभक्ति में पूरी तरह रंगी नजर आई। श्री काशी विश्वनाथ धाम समेत जिले के सभी प्रमुख शिवालयों में तड़के सुबह से ही श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
मंदिर प्रशासन ने विश्वनाथ धाम पहुंचने वाले कांवड़ियों का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया, जबकि पूरा शहर 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयघोष से गूंज उठा।
रविवार शाम से ही देश के विभिन्न हिस्सों से आए कांवड़ियों ने गंगा स्नान कर विश्वनाथ धाम की ओर रुख किया।
श्रद्धालु पूरी रात बैरिकेडिंग में कतारबद्ध होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे।

सोमवार सुबह मंगला आरती के बाद चार बजे से जलाभिषेक शुरू हुआ और बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं।

प्रमुख शिवालयों में भी उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के अलावा मार्कंडेय महादेव, महामृत्युंजय महादेव, तिलभांडेश्वर महादेव, गौरी केदारेश्वर महादेव, त्रिलोचन महादेव और ओंकारेश्वर महादेव सहित सभी प्रमुख शिवालयों में भक्तों ने जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की।
40 हजार यादव बंधुओं की ऐतिहासिक जलाभिषेक यात्रा
चंद्रवंशी गोप सेवा समिति के बैनर तले आयोजित 94वीं जलाभिषेक यात्रा में 40 हजार से अधिक यादव बंधुओं ने भाग लिया। यात्रा की शुरुआत गौरी केदारेश्वर महादेव मंदिर से हुई और श्रद्धालुओं ने लगभग 17 किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए नौ प्रमुख शिवालयों में जलाभिषेक किया।
परंपरा के अनुसार 21 श्रद्धालुओं को ही श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में जलाभिषेक की अनुमति मिली।
शिविरों में भजन-कीर्तन और सेवा का माहौल
लक्सा, मैदागिन, मंडुवाडीह, चितरंजन पार्क और अन्य स्थानों पर बनाए गए कांवड़िया शिविरों में श्रद्धालुओं के लिए विश्राम, भोजन और चिकित्सा की व्यवस्था की गई। पूरी रात भजन-कीर्तन, शिव स्तुति और सेवा कार्यों का सिलसिला चलता रहा। सुबह गंगा स्नान के बाद श्रद्धालु जल लेकर बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए रवाना हुए।
प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए हैं, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
