काशी रोपवे में पान मसाला वालों की खैर नहीं, पीक थूकने पर लगेगा जुर्माना, सफाई के लिए भी खास इंतजाम
वाराणसी। धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी काशी में यातायात व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बन रहा रोपवे प्रोजेक्ट अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। कैंट से गोदौलिया तक प्रस्तावित 3.85 किलोमीटर लंबे रोपवे का करीब 96 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। दिसंबर से इसके संचालन की उम्मीद है। रोपवे शुरू होने के बाद यात्रियों को कैंट से गोदौलिया तक का सफर महज 15 से 16 मिनट में पूरा करने की सुविधा मिलेगी। इससे शहर के व्यस्त मार्गों पर लगने वाले जाम से भी काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
रोपवे के संचालन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए यात्रियों के लिए कई नियम निर्धारित किए गए हैं। गंडोले और स्टेशनों पर पान-गुटखा खाने तथा थूकने पर प्रतिबंध रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा। इसी को देखते हुए स्टेशनों के बाहर पीकदान भी लगाए जाएंगे। इसके अलावा रोपवे कॉरिडोर में ड्रोन उड़ाने की अनुमति नहीं होगी। पतंग और मांझे से रोपवे के संचालन में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए भी सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
148 गंडोलों में बैठ सकेंगे 10-10 यात्री
रोपवे परियोजना में कुल 148 गंडोले लगाए गए हैं। प्रत्येक गंडोले में एक साथ 10 यात्री सफर कर सकेंगे। दो गंडोले आपातकालीन परिस्थितियों के लिए सुरक्षित रखे जाएंगे। परियोजना की प्रस्तावित क्षमता एक घंटे में करीब 3000 यात्रियों को सफर कराने की है। यात्रियों की संख्या और जरूरत के अनुसार गंडोलों का संचालन किया जाएगा।
50 रुपये होगा कैंट से गोदौलिया तक का किराया
रोपवे में सफर के लिए यात्रियों को दूरी के अनुसार किराया देना होगा। अलग-अलग स्टेशनों के बीच न्यूनतम किराया 10 रुपये से शुरू होगा, जबकि कैंट से गोदौलिया तक का किराया 50 रुपये निर्धारित बताया गया है। नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड से भुगतान करने पर यात्रियों को 20 प्रतिशत की छूट मिलेगी। एक यात्री अधिकतम सात किलोग्राम तक सामान साथ ले जा सकेगा। इससे अधिक वजन का सामान होने पर अतिरिक्त टिकट लेना होगा। कैंट स्टेशन पर यात्रियों के सामान के लिए लॉकर की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।
तकनीकी खराबी और तेज हवा से निपटने की व्यवस्था
रोपवे संचालन के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में जनरेटर बैकअप की व्यवस्था रहेगी। किसी तकनीकी समस्या के कारण गंडोला रुकने पर यात्रियों को सुरक्षित नजदीकी स्टेशन तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक पोल और गंडोले की निगरानी कंट्रोल रूम से होगी। रोपवे के संचालन के लिए हवा की अधिकतम सीमा 60 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। इससे अधिक तेज हवा चलने पर गंडोले का संचालन स्वतः रोक दिया जाएगा। गंडोले की अधिकतम गति 6 मीटर प्रति सेकंड यानी लगभग 21.6 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।
बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधाएं
रोपवे स्टेशनों पर यात्रियों की सुविधा के लिए लिफ्ट, एस्केलेटर और सीढ़ियों की व्यवस्था की गई है। दिव्यांग यात्री व्हीलचेयर के माध्यम से गंडोले तक पहुंच सकेंगे। गंडोले में फोल्डेबल सीट की सुविधा दी गई है, जिससे जरूरत पड़ने पर व्हीलचेयर रखने के लिए जगह बनाई जा सकेगी। यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंडोले के दरवाजे अंदर से नहीं खुलेंगे। आपात स्थिति में अधिकृत कर्मचारी ही बाहर से दरवाजा खोल सकेंगे।
कैंट रेलवे स्टेशन से सीधे रोपवे स्टेशन तक पहुंचेगा रास्ता
काशी आने वाले रेल यात्रियों को भी रोपवे का लाभ देने की तैयारी है। इसके लिए कैंट रेलवे स्टेशन के वेटिंग हॉल से रोपवे स्टेशन तक सीधा संपर्क मार्ग तैयार किया जा रहा है। इससे यात्रियों और श्रद्धालुओं को सामान लेकर रेलवे स्टेशन से बाहर निकलकर जाम वाले रास्तों से गुजरने की परेशानी कम होगी। रोपवे परियोजना के तहत कुल पांच स्टेशन बनाए गए हैं, जिनमें कैंट, विद्यापीठ, रथयात्रा, गिरिजाघर और गोदौलिया शामिल हैं।
रोपवे परियोजना निदेशक पूजा मिश्रा के अनुसार, रोपवे प्रतिदिन 16 घंटे संचालित होगा। इसमें यूरोपीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप उपकरण लगाए गए हैं और स्विट्जरलैंड के इंजीनियरों की निगरानी में निर्माण एवं सुरक्षा जांच की गई है। रोपवे शुरू होने से काशी में सार्वजनिक परिवहन को नया विकल्प मिलेगा और पर्यटकों को आसमान से शहर की ऐतिहासिक गलियों, मंदिरों और सांस्कृतिक विरासत को देखने का अवसर भी मिलेगा।
