वाराणसी में गंगा प्रदूषण का नया खुलासा: वरुणा के रास्ते गंगा में गिर रहे 48 नाले, जल निगम की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता
वाराणसी। गंगा को स्वच्छ रखने के दावों के बीच जल निगम के ताजा सर्वे ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, गंगा में सीधे नाले गिरने की बजाय उसकी प्रमुख सहायक नदी वरुणा के माध्यम से 48 नालों का प्रदूषित पानी गंगा तक पहुंच रहा है।
इनमें 43 नाले नगर सीमा के भीतर और 5 नाले शहरी सीमा के बाहर स्थित हैं। यह रिपोर्ट मई 2026 में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) को भेजी गई है।
सर्वे के अनुसार वरुणा नदी आदिकेशव घाट पर गंगा में मिलती है, जिससे इन नालों का गंदा पानी अंततः गंगा में पहुंच रहा है। वर्षों से अतिक्रमण, सीवर और ठोस कचरे के दबाव के कारण वरुणा नदी का प्राकृतिक स्वरूप लगातार प्रभावित हो रहा है।
कई स्थानों पर स्थिति यह है कि नदी में प्राकृतिक जल प्रवाह की तुलना में नालों का पानी अधिक दिखाई देता है।
एनजीटी के निर्देश के बावजूद धीमी प्रगति
गंगा, वरुणा और असि नदी में गिरने वाले नालों को बंद कराने के लिए वर्ष 2021 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में याचिका दायर की गई थी। इसके बाद प्रशासन को पांच वर्षों के भीतर नालों को टैप करने और प्रदूषण नियंत्रण की कार्ययोजना लागू करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि अब तक अपेक्षित स्तर पर कार्य पूरा नहीं हो सका है।

ऑक्सीजन की कमी से मर चुकी हैं मछलियां
मत्स्य विभाग के अनुसार अक्टूबर 2025 में वरुणा नदी में बड़ी संख्या में मछलियां मृत मिली थीं। जांच में पानी में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा बेहद कम पाई गई थी, जिससे नदी की बिगड़ती स्थिति उजागर हुई थी।
होटल और डेयरियों का गंदा पानी भी गंगा में
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि राम घाट, भैरव घाट, अस्सी घाट, नमो घाट और सामने घाट के आसपास स्थित कई होटल, मकान और डेयरियों का गंदा पानी भी विभिन्न नालों के जरिए गंगा में पहुंच रहा है। इससे नदी की स्वच्छता पर गंभीर असर पड़ रहा है।
असि नदी पर अतिक्रमण से बिगड़ी स्थिति
भूमि संरक्षण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार असि नदी की चौड़ाई लगभग 10 मीटर से घटकर महज 2.5 मीटर रह गई है।
चितईपुर, करौंदी, नगवां और अन्य इलाकों में अतिक्रमण, सीवर और निर्माण मलबे के कारण नदी का प्राकृतिक बहाव बाधित हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सफाई अभियान से नहीं, बल्कि अतिक्रमण हटाकर ही असि नदी का पुनर्जीवन संभव है।

क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी रोहित सिंह ने बताया कि वरुणा में गिरने वाले सभी 48 नालों का सर्वे पूरा कर लिया गया है और इन्हें जल्द टैप करने की योजना तैयार की जा रही है।
वहीं जल निगम के अधिशासी अभियंता ए.के. सिंह का कहना है कि यदि कहीं भी गंगा में सीधे नाली का पानी गिरने की पुष्टि होती है तो उसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
