वाराणसी में नए सीएमओ का सख्त रुख, स्वास्थ्य योजनाओं की निगरानी होगी और कड़ी
वाराणसी। जिले के नवागत मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह ने कार्यभार संभालने के दूसरे ही दिन स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सख्ती शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री डैशबोर्ड की सतत निगरानी के क्रम में बुधवार को सीएमओ कार्यालय में योजनाओं और सेवाओं की बिंदुवार समीक्षा की गई। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि मुख्यमंत्री डैशबोर्ड से जुड़े कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर दर्ज योजनाओं और सेवाओं की प्रगति की लगातार निगरानी की जा रही है। पिछले दिनों जिन बिंदुओं पर लापरवाही सामने आई है, उनसे संबंधित जिम्मेदार लोगों को चिह्नित किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यों में लापरवाही या निर्धारित मानकों की अनदेखी करने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।
पूर्व सीएमओ के निलंबन के बाद विभाग में बढ़ी सख्ती
मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर अपेक्षित प्रगति और कार्यों में लापरवाही के मामले में पूर्व मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मुकेश कुमार के खिलाफ शासन स्तर से कार्रवाई हो चुकी है। उन्हें निलंबित कर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशालय, लखनऊ से संबद्ध किया गया है और मामले की जांच भी कराई जा रही है।
ऐसे में नवागत सीएमओ डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह ने कार्यभार संभालने के साथ ही मुख्यमंत्री डैशबोर्ड के प्रत्येक बिंदु की समीक्षा शुरू कर दी है। कबीर नगर स्थित सीएमओ कार्यालय में अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों के साथ मैराथन बैठक कर योजनाओं की प्रगति, लक्ष्य और जमीनी स्थिति की पड़ताल की जा रही है।
एंबुलेंस सेवा को बनाया प्राथमिकता
समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री डैशबोर्ड के प्रमुख बिंदुओं में शामिल एंबुलेंस सेवा को प्राथमिकता दी गई। एंबुलेंस सेवा से जुड़ी नोडल एजेंसी के साथ बैठक में जिले में संचालित एंबुलेंस की उपलब्धता, रिस्पांस टाइम और एडवांस लाइफ सपोर्ट से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई।
सीएमओ के अनुसार जिले में बच्चों और महिलाओं के लिए 102 नंबर की 38 एंबुलेंस तथा 108 नंबर की 28 एंबुलेंस संचालित हैं। इसके अतिरिक्त जीवन रक्षक प्रणालियों से लैस पांच एंबुलेंस भी सेवाएं दे रही हैं। प्रत्येक श्रेणी की एंबुलेंस के लिए मरीज तक पहुंचने की निर्धारित समय-सीमा तय है।
मॉक ड्रिल से जांची जाएगी एंबुलेंस की टाइमलाइन
डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि वर्तमान में 102 सेवा की एंबुलेंस सूचना मिलने के बाद करीब 20 मिनट और 108 सेवा की एंबुलेंस करीब 15 मिनट में पहुंचने का दावा किया जा रहा है। हालांकि निर्धारित मानकों के अनुसार इनके रिस्पांस टाइम की नियमित समीक्षा जरूरी है। इसके लिए समय-समय पर मॉक ड्रिल कराकर एंबुलेंस के मौके तक पहुंचने की वास्तविक समय-सीमा की जांच की जाएगी।
मुख्यमंत्री डैशबोर्ड के तहत एंबुलेंस सेवा के अलावा जननी सुरक्षा योजना, टेली रेडियोलॉजी, मोबाइल मेडिकल यूनिट और न्यूरोसिटी योजना समेत अन्य प्रमुख स्वास्थ्य सेवाओं की भी बिंदुवार समीक्षा की जा रही है। नवागत सीएमओ ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सभी योजनाओं की प्रगति निर्धारित मानकों के अनुरूप सुनिश्चित की जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए।
