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वाराणसी के अस्सी घाट पर NDRF का जागरूकता कार्यक्रम, 200 नाविकों को दिया गया जीवन रक्षक प्रशिक्षण

 गंगा में डूबने की घटनाओं से निपटने के लिए नाविकों को सिखाए गए बचाव के तरीके, CPR और प्राथमिक उपचार की भी दी गई जानकारी

वाराणसी। गंगा नदी में डूबने की घटनाओं और जल संबंधी आपात स्थितियों के दौरान लोगों की जान बचाने के उद्देश्य से 11वीं वाहिनी राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की ओर से वाराणसी के अस्सी घाट पर सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कमांडिंग ऑफिसर अनूप सिंह बिष्ट के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय नाविकों को जीवन रक्षक कौशल और डूबने से बचाव की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम से कुल 200 नाविक लाभान्वित हुए।

 

प्रशिक्षण के दौरान एनडीआरएफ के जवानों ने नाविकों को बताया कि गंगा में किसी व्यक्ति के डूबने या अन्य जल संबंधी आपात स्थिति में किस तरह सुरक्षित और प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया करनी चाहिए।

प्रशिक्षण के दौरान एनडीआरएफ के जवानों ने नाविकों को बताया कि गंगा में किसी व्यक्ति के डूबने या अन्य जल संबंधी आपात स्थिति में किस तरह सुरक्षित और प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया करनी चाहिए।

प्रतिभागियों को तैराक और गैर-तैराक व्यक्तियों के बचाव के तरीके समझाए गए। इसके साथ ही लाइफ बॉय, लाइफ जैकेट और रस्सियों के सही इस्तेमाल का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। आपात स्थिति में उपलब्ध संसाधनों की मदद से अस्थायी तैरने वाले उपकरण और स्ट्रेचर तैयार करने की विधि की जानकारी भी दी गई।

 

CPR और प्राथमिक उपचार के तरीके बताए

कार्यक्रम में जल दुर्घटना के बाद प्रभावित व्यक्ति को प्राथमिक उपचार देने के तरीकों पर भी विशेष जोर दिया गया। एनडीआरएफ कर्मियों ने प्रतिभागियों को कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR), रक्तस्राव नियंत्रित करने और सर्पदंश की स्थिति में प्राथमिक उपचार से जुड़ी जानकारी दी।

इसके अलावा आकाशीय बिजली से संबंधित पूर्व चेतावनी के लिए दामिनी ऐप और आपदा संबंधी चेतावनियों एवं अलर्ट के लिए सचेत ऐप की उपयोगिता के बारे में भी बताया गया।

एनडीआरएफ का उद्देश्य नाविकों को इस तरह प्रशिक्षित करना था कि वे घाटों पर श्रद्धालुओं और आम नागरिकों की सुरक्षा में सहयोग कर सकें तथा किसी आपात स्थिति में उपलब्ध संसाधनों का समुचित उपयोग कर समय रहते मदद पहुंचाने में सक्षम हों।

एनडीआरएफ का उद्देश्य नाविकों को इस तरह प्रशिक्षित करना था कि वे घाटों पर श्रद्धालुओं और आम नागरिकों की सुरक्षा में सहयोग कर सकें तथा किसी आपात स्थिति में उपलब्ध संसाधनों का समुचित उपयोग कर समय रहते मदद पहुंचाने में सक्षम हों।

एनडीआरएफ का उद्देश्य नाविकों को इस तरह प्रशिक्षित करना था कि वे घाटों पर श्रद्धालुओं और आम नागरिकों की सुरक्षा में सहयोग कर सकें तथा किसी आपात स्थिति में उपलब्ध संसाधनों का समुचित उपयोग कर समय रहते मदद पहुंचाने में सक्षम हों।

नाविकों को बांटे गए प्रमाण-पत्र

कार्यक्रम के समापन पर 11वीं वाहिनी एनडीआरएफ के कमांडिंग ऑफिसर अनूप सिंह बिष्ट और उप जिलाधिकारी (सदर), वाराणसी ने प्रतिभागी नाविकों को प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र, टी-शर्ट और खाद्य पैकेट वितरित किए।

एनडीआरएफ की यह पहल स्थानीय समुदाय को आपदा प्रबंधन और जीवन रक्षक कौशल के प्रति जागरूक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से नाविकों की आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करने और गंगा घाटों पर जनसुरक्षा में उनकी भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

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