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मंडुवाडीह पुलिस का खेल! छिनैती को बनाया ‘गुमशुदगी’, शिक्षक को दिखाया कोर्ट-कचहरी का डर

वाराणसी के मंडुवाडीह थाने में मोबाइल छिनैती की वारदात को पुलिस ने गुमशुदगी में बदला। पीड़ित शिक्षक को कोर्ट-कचहरी का डर दिखाकर FIR दर्ज नहीं की। जानें पूरी खबर।

वाराणसी। उत्तर प्रदेश पुलिस जहाँ एक ओर अपराध मुक्त प्रदेश का दावा करती है, वहीं वाराणसी के मंडुवाडीह थाने से खाकी को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ पुलिस पर आरोप है कि उन्होंने एक शिक्षक के साथ हुई मोबाइल छिनैती (Snatching) की घटना को ‘गुमशुदगी’ (Lost Article) में बदलकर मामले को रफा-दफा कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

पेशा से अध्यापक मनोज द्विवेदी रोज़ाना की तरह ट्यूशन पढ़ाकर रात करीब 8 बजे अपने घर लौट रहे थे। तभी बाइक सवार दो अज्ञात बदमाशों ने उनके हाथ से मोबाइल छीना और रफूचक्कर हो गए। पीड़ित जब न्याय की उम्मीद में मंडुवाडीह थाने पहुँचा, तो वहाँ मौजूद दरोगा ने तहरीर तो ली, लेकिन बिना कुछ पूछे मोबाइल खोने की ऑनलाइन रिपोर्ट (Missing Report) दर्ज कर दी।

पुलिस ने बरगलाया: "कोर्ट-कचहरी के चक्कर में पड़ जाओगे"

पीड़ित मनोज द्विवेदी का आरोप है कि जब उन्होंने छिनैती की FIR दर्ज करने की बात कही, तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें कोर्ट-कचहरी और लंबी कानूनी प्रक्रिया का डर दिखाना शुरू कर दिया। पुलिस ने कथित तौर पर सलाह दी कि: अगर छिनैती का केस दर्ज कराओगे तो सालों कचहरी दौड़ना पड़ेगा, इससे अच्छा है लॉस्ट आर्टिकल की रिपोर्ट लिखवा लो, झंझट नहीं होगा।"

 

कागजों में छिपाया अपराध

हैरानी की बात यह है कि पुलिस द्वारा जारी रिपोर्ट में मोबाइल का ब्रांड (Vivo) और IMEI नंबर तो दर्ज है, लेकिन घटना की प्रकृति को पूरी तरह बदल दिया गया है। पीड़ित चिल्ला-चिल्ला कर कह रहा है कि मोबाइल छीना गया है, जबकि पुलिसिया रिकॉर्ड इसे 'लापरवाही से खोया हुआ' बता रहे हैं।

जनता में आक्रोश और सुरक्षा पर सवाल

इस घटना ने वाराणसी पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अगर पुलिस आंकड़ों को कम दिखाने के लिए अपराध की श्रेणी बदलेगी, तो अपराधियों के हौसले बुलंद होंगे। छिनैती जैसे गंभीर अपराध को 'गुमशुदगी' बनाना न केवल पीड़ित के साथ अन्याय है, बल्कि कानून के साथ खिलवाड़ भी है। 

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