गणपति बप्पा मोरया के जयघोष से गूंज उठी काशी, दो किमी तक दिखी मराठी लोकआभा
वाराणसी। गणेश उत्सव के तहत पांच दिनों तक काशी में पूजे गए मुंबई के प्रसिद्ध लालबाग के राजा की प्रतिमूर्ति श्रीगणेश को शुक्रवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ विदाई दी गई। श्रीकाशी मराठा गणेश उत्सव समिति की ओर से ठठेरी बाजार स्थित शेरवाली कोठी में स्थापित गणेश प्रतिमा की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। गणपति बप्पा मोरया और हर-हर महादेव के जयघोष से काशी का वातावरण भक्तिमय हो उठा। करीब दो किलोमीटर लंबी शोभायात्रा को पूरा होने में लगभग पांच घंटे लगे।
दोपहर में ठठेरी बाजार की गली से गणेश प्रतिमा को मुख्य मार्ग पर लाया गया। फूलों से सुसज्जित रथ पर प्रतिमा को विराजमान कर विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद नीचीबाग से शोभायात्रा शुरू हुई। महाराष्ट्र की पारंपरिक लोककला की झलक उस समय देखने को मिली, जब शिवगर्जना ढोल-ताशा पथक के 80 सदस्यीय दल ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन पर प्रस्तुति दी। मराठी परिधान में सजी महिलाएं ढोल-ताशे की थाप पर थिरकती नजर आईं।
शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालु गणपति बप्पा मोरया, जय गणेश और बप्पा का हो जय-जयकार के उद्घोष करते हुए आगे बढ़ते रहे। शहनाई की धुन और घोड़े पर सवार देव स्वरूपों ने यात्रा की भव्यता बढ़ाई। शोभायात्रा श्रीकाशी विश्वनाथ धाम पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने गणेश जी के साथ बाबा विश्वनाथ का भी दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद लिया।
गोदौलिया क्षेत्र में ढोल-ताशा पथक की प्रस्तुति और महिलाओं के पारंपरिक नृत्य ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने गणेश प्रतिमा पर पुष्पवर्षा की और आरती उतारी। शोभायात्रा आगे बढ़ते हुए लक्सा स्थित लक्ष्मीकुंड पहुंची। यहां महिलाओं और पुरुषों ने गणपति बप्पा की आरती की। इसके बाद गणेश प्रतिमा को रथ से उतारकर कंधे पर लेकर लक्ष्मीकुंड में विधि-विधान से विसर्जित किया गया। श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष फिर आने का निमंत्रण देते हुए गणपति बप्पा को विदाई दी।
शोभायात्रा में समिति के संरक्षक संतोष पाटिल, अध्यक्ष आनंद सूर्यवंशी, महामंत्री अन्ना मोरे, हनुमान शिंदे, माणिक राव पाटिल, सुहास पाटिल, तानाजी पाटिल, हणमंत राव मोरे, चंद्र शेखर शिंदे, अजीत पाटिल, मूसा मूलानी, सोनू पाटिल, बजरंग शिंदे, सुनील शिंदे, विनोद जाधव, चक्रवर्ती विजय नावड़, डॉ. कैलाश सिंह विकास और सचिन शाह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल रहे।
