हर-हर महादेव से गूंज उठी काशी, सावन शिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ के दरबार में उमड़ा जनसैलाब
वाराणसी। सावन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मंगलवार को सावन शिवरात्रि के अवसर पर धर्मनगरी काशी में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। भोर से ही श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में बाबा विश्वनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा क्षेत्र शिवमय नजर आया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
मान्यता है कि सावन शिवरात्रि के दिन भगवान शिव का दर्शन-पूजन और जलाभिषेक करने से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है। इसी आस्था के साथ देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु काशी पहुंचे।

कांवड़ियों की लगीं लंबी कतारें
सावन शिवरात्रि को लेकर सोमवार देर रात से ही श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र में श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की भीड़ बढ़ने लगी थी। मंदिर के गेट नंबर-1, गेट नंबर-4, गेट नंबर-4बी समेत विभिन्न मार्गों पर बनाए गए बैरिकेडिंग क्षेत्र में कांवड़ियों की लंबी कतारें दिखाई दीं।
जलाभिषेक के लिए आने वाले श्रद्धालुओं में प्रयागराज से पहुंचे कांवड़ियों की संख्या भी काफी रही। संगम से गंगाजल लेकर कांवड़िए काशी पहुंचे और बाबा विश्वनाथ के साथ माता पार्वती का दर्शन-पूजन किया। कांवड़ियों ने हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों के बीच बाबा को गंगाजल अर्पित किया।
गंगाजल, दूध और बेलपत्र चढ़ाकर की पूजा
सावन शिवरात्रि पर श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ के ज्योतिर्लिंग पर गंगाजल, दूध और बेलपत्र अर्पित किए। कई श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर भगवान शिव की आराधना की। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पूरे दिन भक्तिमय माहौल बना रहा।

सुरक्षा व्यवस्था के रहे पुख्ता इंतजाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस की ओर से सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए गए। मैदागिन से श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर तथा गिरजाघर चौराहे से मंदिर की ओर जाने वाले मार्गों को नो-व्हीकल जोन रखा गया। श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग के साथ पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई।
मंदिर परिसर से लेकर घाटों तक सिविल पुलिस, पैरामिलिट्री बल और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। प्रशासन की ओर से लगातार निगरानी रखी गई, ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन-पूजन में किसी तरह की परेशानी न हो और भीड़ के बीच सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे।
