स्वीडन के हिंदू मंदिर में काशी के पंडित बने पुजारी, डेढ़ लाख रुपये मासिक वेतन
वाराणसी। काशी की धार्मिक परंपरा और वैदिक विद्या अब विदेशों में भी अपनी पहचान बना रही है। वाराणसी के पं. आचार्य कृष्ण कांत तिवारी का चयन स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम स्थित हिंदू मंदिर में नियमित पुजारी के रूप में हुआ है। काशी में अपने पैतृक देवालय में वर्षों से पूजा-पाठ करने वाले आचार्य कृष्ण कांत अब विदेश में भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार स्वीडन के हिंदू मंदिर में पुजारी चयन के लिए बाकायदा इंटरव्यू आयोजित किया गया था, जिसमें कर्मकांड, राग-भोग, आरती और धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़े कई प्रश्न पूछे गए। आचार्य कृष्ण कांत ने सभी सवालों के सटीक उत्तर देकर चयन प्रक्रिया में सफलता हासिल की। उनके योग और कराटे के ज्ञान ने भी उन्हें अन्य उम्मीदवारों से अलग पहचान दिलाई।
बताया जा रहा है कि उन्हें करीब डेढ़ लाख रुपये मासिक वेतन दिया जा रहा है। इसके अलावा रहने और भोजन की सुविधा पूरी तरह निशुल्क है, जबकि दक्षिणा अलग से मिलती है।
13 देवताओं की पूजा की जिम्मेदारी
स्टॉकहोम स्थित हिंदू मंदिर में भगवान विष्णु, महेश सहित 13 देवी-देवताओं की नियमित पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी आचार्य कृष्ण कांत के पास है। धार्मिक वीजा श्रेणी के तहत वह साल में छह महीने तक वहां सेवाएं देंगे।
आचार्य कृष्ण कांत को वैदिक कर्मकांड और धार्मिक अनुष्ठानों का करीब 10 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने वाराणसी से संस्कृत विषय में शास्त्री और आचार्य की उपाधि प्राप्त की है।
स्वीडिश हिंदुओं के धार्मिक आयोजनों का संचालन
मंदिर में नियमित पूजा के अलावा स्वीडन में रह रहे हिंदू समुदाय के धार्मिक कार्यक्रमों, यज्ञोपवीत, कर्मकांड और अनुष्ठानों का संचालन भी अब आचार्य कृष्ण कांत द्वारा किया जा रहा है। बताया गया कि हिंदू सोसाइटी की ओर से आयोजित विशेष आयोजनों में भी उनकी प्रमुख भूमिका रहती है।
बीएचयू के पूर्व छात्र ने दिया सुझाव
बीएचयू के पूर्व छात्र और स्वीडन में कार्यरत वैज्ञानिक डॉ. अंशुमान सिंह ने आचार्य कृष्ण कांत को इस पद के लिए आवेदन करने का सुझाव दिया था। उनकी योग्यता और अनुभव को देखते हुए हिंदू मंदिर स्टॉकहोम हिंदू सोसाइटी ने उन्हें चयनित किया।
बताया जा रहा है कि मंदिर में प्रतिदिन करीब 200 श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, जबकि त्योहारों के समय यह संख्या 2000 तक पहुंच जाती है। भविष्य में यहां और भी सहयोगी पंडितों की नियुक्ति की तैयारी चल रही है।
