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गंगा में नाव पर इफ्तार मामला: 14 आरोपियों को नहीं मिली राहत, कोर्ट ने कहा - गंभीर है अपराध

गंगा में नाव पर इफ्तार मामला: 14 आरोपियों को नहीं मिली राहत, कोर्ट ने कहा - गंभीर है अपराध

वाराणसी। वाराणसी के चर्चित गंगा में नाव पर इफ्तार प्रकरण में बुधवार को अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी 14 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। जिला एवं सत्र न्यायालय कोर्ट संख्या-06 के पीठासीन अधिकारी आलोक कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में नरमी नहीं बरती जा सकती।

यह मामला थाना कोतवाली में दर्ज अपराध संख्या 65/2026 से जुड़ा है। आरोप है कि कुछ लोगों ने गंगा नदी में नाव पर बैठकर इफ्तार पार्टी की, जिसमें मांसाहार का सेवन किया गया और उसके अवशेष गंगा में फेंके गए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला तेजी से सुर्खियों में आया और धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया गया।

पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता BNS की कई गंभीर धाराओं के साथ-साथ आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मुकदमा दर्ज किया है, जिसमें धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, सामाजिक वैमनस्य फैलाने और सार्वजनिक शांति भंग करने जैसे आरोप शामिल हैं।

 

 

सरकारी वकील और वादी पक्ष के अधिवक्ताओं ने अदालत में दलील दी कि यह घटना जानबूझकर की गई और वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई। गंगा जैसी पवित्र नदी में इस प्रकार का कृत्य अत्यंत आपत्तिजनक है और इससे समाज में आक्रोश उत्पन्न हुआ।

वहीं, बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि आरोपियों को साजिश के तहत फंसाया गया है, वीडियो की सत्यता संदिग्ध है और कोई ठोस भौतिक साक्ष्य बरामद नहीं हुआ है। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि आरोपियों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि मामला केवल एक साधारण घटना नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द और सार्वजनिक शांति से जुड़ा हुआ है। धार्मिक आस्था से जुड़े स्थान पर इस प्रकार का कृत्य गंभीर माना जाएगा और सोशल मीडिया पर इसके प्रसार से इसकी गंभीरता और बढ़ जाती है। अदालत ने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जमानत देना अधिकार नहीं, बल्कि न्यायालय का विवेकाधिकार है। मामले की परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने पाया कि आरोपियों को जमानत देने से साक्ष्यों से छेड़छाड़ या मामले को प्रभावित करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

इन्हीं आधारों पर अदालत ने सभी 14 आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज करते हुए उन्हें राहत देने से इंकार कर दिया। इस फैसले के बाद प्रशासन भी सतर्क हो गया है और वाराणसी के घाटों तथा संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है, जहां धार्मिक आस्था और सामाजिक संतुलन से जुड़े मुद्दे सामने आते हैं।

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