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महंगाई की मार! दालों के बढ़ते दाम से बिगड़ा रसोई का बजट, आम आदमी की थाली हुई फीकी

महंगाई की मार! दालों के बढ़ते दाम से बिगड़ा रसोई का बजट, आम आदमी की थाली हुई फीकी

वाराणसी। महंगाई की मार अब केवल पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और रसोई गैस तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसका असर सीधे आम आदमी की थाली पर भी दिखाई देने लगा है। प्रोटीन का प्रमुख स्रोत मानी जाने वाली दालों की कीमतों में लगातार वृद्धि होने से घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। वहीं मानसून को लेकर अनिश्चितताओं के बीच आने वाले दिनों में दालों के दाम और बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

वाराणसी की प्रमुख थोक मंडी विश्वेश्वरगंज तथा फुटकर बाजारों में पिछले एक महीने के दौरान लगभग सभी प्रमुख दालों के दाम में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दालों की कीमतों में आई तेजी ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। बढ़ती महंगाई के कारण अब लोगों की थाली में गाढ़ी दाल की जगह पतली दाल परोसने की मजबूरी बढ़ती जा रही है।

भैरवनाथ व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रतीक गुप्ता के अनुसार, विश्वेश्वरगंज थोक मंडी में चना दाल का भाव एक माह पहले 70 रुपये प्रति किलो था, जो बढ़कर 75 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। इसी प्रकार अरहर दाल 112 रुपये से बढ़कर 118 रुपये प्रति किलो बिक रही है। मूंग दाल की कीमत 96 रुपये से बढ़कर 100 रुपये प्रति किलो हो गई है।

उन्होंने बताया कि मसूर दाल के दाम में भी वृद्धि हुई है और इसका भाव 74 रुपये से बढ़कर 75 रुपये प्रति किलो हो गया है। वहीं उड़द दाल, जो एक माह पूर्व 135 रुपये प्रति किलो बिक रही थी, अब 140 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है।

दूसरी ओर, खोजवा बाजार के किराना व्यापारी सचिन के अनुसार फुटकर बाजार में भी दालों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। चना दाल का खुदरा मूल्य 65 रुपये से बढ़कर 70 रुपये प्रति किलो हो गया है। अरहर दाल 105 रुपये से बढ़कर 115 रुपये प्रति किलो बिक रही है। मूंग दाल का भाव 100 रुपये से बढ़कर 105 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है।

इसी तरह मसूर दाल 70 रुपये से बढ़कर 75 रुपये प्रति किलो और उड़द दाल 110 रुपये से बढ़कर 120 रुपये प्रति किलो बिक रही है। खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के बीच दालों में आई तेजी ने मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के परिवारों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून सामान्य नहीं रहा और उत्पादन प्रभावित हुआ तो आने वाले समय में दालों की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। ऐसे में महंगाई की यह मार आम उपभोक्ताओं की जेब पर और भारी पड़ सकती है।

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