राजकीय नर्सेस संघ का चरणबद्ध आंदोलन शुरू, काली पट्टी बांधकर नर्सिंग कर्मियों ने जताया विरोध
वाराणसी। राजकीय नर्सेस संघ उत्तर प्रदेश के आह्वान पर प्रदेशभर में नर्सिंग संवर्ग का चरणबद्ध आंदोलन शुक्रवार से शुरू हो गया। लंबित मांगों के समर्थन में विभिन्न जनपदों में कार्यरत नर्सिंग कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराया। संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि मांगों के संबंध में शासनादेश जारी नहीं किए गए, तो पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।
संघ की प्रमुख मांगों में नर्सिंग संवर्ग को समान भत्ते देने, गृह जनपद में तैनाती की व्यवस्था लागू करने, निदेशालय से लेकर चिकित्सालय स्तर तक पात्र पदों पर पदोन्नति एवं भर्ती सुनिश्चित करने, बीएससी नर्सिंग की भांति उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए सवेतन अवकाश की सुविधा देने तथा चिकित्सालयों में क्रेच (पालनाघर) की व्यवस्था करने सहित अन्य मांगें शामिल हैं।
राजकीय नर्सेस संघ के महामंत्री अशोक कुमार ने बताया कि इन मांगों को लेकर उप मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव और महानिदेशक स्तर पर कई बार वार्ता हो चुकी है। संघ का कहना है कि विभिन्न स्तरों पर मांगों के संबंध में लिखित सहमति दिए जाने के बावजूद अब तक आवश्यक शासनादेश जारी नहीं किए गए हैं। इससे प्रदेशभर के नर्सिंग कर्मियों में असंतोष बढ़ रहा है।
संघ की ओर से शर्ली भंडारी ने कहा कि नर्सिंग संवर्ग लंबे समय से अपनी मांगों के समाधान की प्रतीक्षा कर रहा है। इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। उन्होंने लंबित मांगों के समाधान में हो रही देरी के लिए शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी तय किए जाने की बात कही।

तीन चरणों में आगे बढ़ेगा आंदोलन
संघ ने आंदोलन को लेकर आगामी कार्यक्रम भी घोषित किया है। इसके तहत 9 से 20 अक्टूबर तक नर्सिंग कर्मचारी काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराएंगे। इसके बाद 21 अक्टूबर को सुबह 8 से 10 बजे तक दो घंटे का कार्य बहिष्कार किया जाएगा। वहीं, 22 अक्टूबर को महानिदेशालय स्थित डीजी कार्यालय का घेराव कर लंबित मांगों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
महामंत्री अशोक कुमार ने कहा कि नर्सिंग संवर्ग प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं का अभिन्न अंग है। अस्पतालों में मरीजों की देखभाल और चिकित्सा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में नर्सिंग कर्मियों की अहम भूमिका है। इसके बावजूद उनकी लंबित मांगों का समाधान नहीं होना चिंता का विषय है। संघ ने शासन से मांग की है कि कर्मचारियों की जायज मांगों पर शीघ्र निर्णय लेकर संबंधित शासनादेश जारी किए जाएं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ अपनी मांगों को शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से शासन तक पहुंचाने और उनका समयबद्ध समाधान कराने के पक्ष में है। निर्धारित आंदोलन कार्यक्रम के दौरान सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने पर संघ आगे की रणनीति तय करेगा।
