दुर्गाकुंड में मां कूष्मांडा का भव्य शृंगार, भक्ति में डूबे श्रद्धालु
वाराणसी। दुर्गाकुंड स्थित मां कूष्मांडा मंदिर में चल रहे तीन दिवसीय वार्षिक शृंगार एवं संगीत महोत्सव की विराम निशा में गुरुवार को श्रद्धा और संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिला। स्वर्ण-रजत आभूषणों से सुसज्जित मां कूष्मांडा की दिव्य छवि के दर्शन के लिए शाम से ही भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। मां के जयकारों और घंटा-घड़ियाल की गूंज के बीच पूर्वांचल के 21 कलाकारों ने देवी गीतों और पचरा की प्रस्तुति देकर मां की स्वर साधना की।
मंदिर में शाम से ही मां के शृंगार और पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हो गया था। मंदिर के महंत पं. कौशलपति द्विवेदी और पं. संजय दुबे के सानिध्य में मां का पंचामृत स्नान कराया गया। इसके बाद उन्हें बनारसी लाल साड़ी और लाल चुनरी से सुसज्जित किया गया। कोलकाता से मंगाए गए गुलाब और रजनीगंधा के फूलों से मां का विशेष पुष्प शृंगार किया गया।
मां को मांगटीका, नथिया, स्वर्ण मुकुट और विशेष फाटा हार के साथ स्वर्ण-रजत युक्त मोतियों की लड़ियों से सजाया गया। विविध नैवेद्य, फल, मिष्ठान और पकवानों का भोग अर्पित करने के बाद विधिवत आरती की गई। आरती के पश्चात मंदिर के कपाट भक्तों के दर्शन के लिए खोल दिए गए। देर रात तक श्रद्धालुओं के दर्शन-पूजन का क्रम जारी रहा।
संगीत महोत्सव में प्रख्यात भजन गायक गोपाल राय, विजय कपूर, जौनपुर की भावना सिंह, कल्पना सिंह, विदुषी वर्मा, करिश्मा पांडेय, पीयूष मिश्र, ज्योति माही, पवन परदेशी, ममता शर्मा, नियति वर्मा, प्रियंका पांडेय और अंजली ऊर्वशी समेत 21 कलाकारों ने मां की आराधना की। कलाकारों ने ‘जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी’, ‘अम्बे चरण कमल है तेरे’, ‘कैसे नाही इठलाऊं मेरी मईया है आयी’ और ‘लहरे लाहरदरवा कोहरवा’ जैसे देवी गीतों एवं पचरा की प्रस्तुति से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
संगत कलाकारों में तबले पर मोतीलाल शर्मा, ढोलक पर सोनू, कीबोर्ड पर नीरज, रामाश्रय और शिवांश, पैड पर राहुल तथा बैंजो पर जियाराम ने साथ दिया। कलाकारों का स्वागत पं. कौशलपति द्विवेदी, बिंदु दुबे और सोनू झा ने किया। कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन प्रभुनाथ राय दाढ़ी ने किया।
