वाराणसी। ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश ग्राम्य विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में 'विकसित भारत जी राम जी अधिनियम, 2025' के अंतर्गत प्रथम पंच सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और झारखंड के पंचायत प्रतिनिधियों ने भाग लेकर विकसित पंचायतों के निर्माण, ग्रामीण विकास और स्थानीय स्वशासन को सशक्त बनाने के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया।
मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री एवं ग्राम्य विकास मंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब गांव आत्मनिर्भर, समृद्ध और सशक्त बनेंगे। उन्होंने कहा कि नए अधिनियम का उद्देश्य पंचायतों को अधिक सक्षम, पारदर्शी और जवाबदेह बनाते हुए ग्रामीण विकास को नई गति देना है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में आवास, स्वास्थ्य, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं का लगातार विस्तार हुआ है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों के जीवन स्तर में सुधार आया है।
उपमुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों से गांवों के लिए दीर्घकालिक विकास योजनाएं तैयार करने, महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने तथा स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग के माध्यम से आत्मनिर्भर ग्रामों के निर्माण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने वाराणसी में स्वीकृत गंगा-वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना को भी शहर के विकास की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने कहा कि 'जी राम जी योजना' आगामी 25 वर्षों के ग्रामीण विकास की दीर्घकालिक कार्ययोजना है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से स्वयं सहायता समूहों को बाजार उपलब्ध कराने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए प्रभावी प्रयास करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, बैंकिंग, कनेक्टिविटी और अन्य बुनियादी सुविधाओं का उल्लेखनीय विस्तार हुआ है।
आयुक्त ग्राम्य विकास जी. एस. प्रियदर्शी ने बताया कि एक जुलाई 2026 से लागू नए अधिनियम के बाद आयोजित यह पहला पंच सम्मेलन है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत रोजगार गारंटी योजना में कार्य दिवस 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दिए गए हैं, जिससे ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त रोजगार उपलब्ध होगा।
ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव रोहिणी आर. जी. ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद स्थापित करने और ग्रामीण विकास की नई कार्ययोजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के उद्देश्य से यह सम्मेलन आयोजित किया गया है। उन्होंने बताया कि नए अधिनियम के तहत देश की 2.8 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों में व्यापक स्तर पर विकास कार्यों की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
सम्मेलन में एमएसएमई राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र सिंह, विधायक सौरभ श्रीवास्तव, त्रिभुवन राम, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में पंचायत प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
