×

सरकार को जमीन दी, अब अपनी जमीन के लिए लड़ाई! दालमंडी में शोएब ने मांगी सुरक्षा

Varanasi News, Dalmandi News, Varanasi Property Dispute, Dalmandi Property Dispute, Ancestral Property Dispute, Land Dispute Varanasi, Property Encroachment, Shoaib Ahmed, Varanasi Administration, PWD Measurement, Varanasi Police, Dalmandi Land Dispute

 

वाराणसी। दालमंडी जैसे शहर के प्रमुख और संवेदनशील व्यावसायिक इलाके में पुश्तैनी जमीन को लेकर चल रहा विवाद अब प्रशासन की चौखट तक पहुंच गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास विजन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विकास नीतियों से प्रभावित होकर अपनी पैतृक संपत्ति का आधा हिस्सा जनहित में सरकारी परियोजना के लिए देने वाले मलिक शोएब अहमद ने अब अपनी शेष जमीन की सुरक्षा और निर्बाध निर्माण के लिए प्रशासन से गुहार लगाई है। शोएब अहमद का आरोप है कि जमीन का एक हिस्सा विकास कार्य के लिए देने के बाद उनकी बची हुई संपत्ति पर भी दबाव बनाया जा रहा है और उन्हें परेशान एवं धमकाया जा रहा है।

 

करीब 1200 वर्ग फीट जमीन पर कब्जे का आरोप

शोएब अहमद के मुताबिक, उनकी करीब 1200 वर्ग फीट पुश्तैनी जमीन पर शाहनवाज उर्फ मीनू, उसके पुत्र अब्दुल राजीक और उनके सहयोगियों का लंबे समय से कब्जा है। आरोप है कि संबंधित लोग न तो किराये का भुगतान कर रहे थे और न ही जमीन खाली कर रहे थे। शोएब का कहना है कि पिता के निधन के बाद उन्होंने अपनी पैतृक संपत्ति का आधा हिस्सा विकास कार्य के लिए सरकार के नाम रजिस्ट्री कर दिया, लेकिन इसके बाद उनकी बची हुई जमीन को लेकर विवाद और दबाव और बढ़ गया।

पीड़ित का आरोप है कि उनकी संपत्ति पर कब्जा जमाए लोगों की ओर से उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है। वहीं स्थानीय स्तर पर आरोपियों के कथित प्रभावशाली लोगों से संपर्क को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं। हालांकि, इन चर्चाओं और माफिया तंत्र से कथित संबंधों की स्वतंत्र अथवा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

 

नक्शा स्वीकृत, फिर भी निर्माण में अड़चन

शोएब अहमद का कहना है कि उन्होंने अपनी शेष जमीन पर निर्माण के लिए सक्षम प्राधिकरण से विधिवत नक्शा स्वीकृत कराया है। इसके बावजूद मौके पर निर्माण शुरू करने में लगातार बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं। उनका आरोप है कि दबाव और विवाद के कारण वह अपनी ही जमीन का स्वतंत्र रूप से उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।

इसी बीच विवादित परिसर में मौजूद महज एक पांच इंच की पुरानी और जर्जर दीवार भी क्षतिग्रस्त होकर गिर गया। इसके बाद मामले को लेकर स्थिति और संवेदनशील हो गई।

 

6 सितंबर को PWD की पैमाइश से बदली तस्वीर

मामले में 6 सितंबर को महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। लोक निर्माण विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जमीन की पैमाइश एवं सीमांकन की कार्रवाई की। सरकारी हिस्से की पहचान कर मौके पर निशान लगाए गए तथा पत्थर भी गाड़े गए। पीड़ित का दावा है कि इस कार्रवाई के बाद जमीन को लेकर चल रहे विवाद में तस्वीर कुछ हद तक स्पष्ट हुई लेकिन विपक्षी लगातार कब्जा करना चाहते हैं और लगातार धमकी व दबाव बना रहे हैं।

अब शोएब अहमद चाहते हैं कि प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए और उनकी शेष पुश्तैनी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करे, ताकि स्वीकृत नक्शे के अनुसार वह निर्माण कार्य कर सकें।

अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

दालमंडी जैसे घनी आबादी और व्यावसायिक गतिविधियों वाले इलाके में पुश्तैनी संपत्ति का यह विवाद कई सवाल खड़े करता है। एक तरफ जमीन का हिस्सा विकास परियोजना के लिए सरकार को दिए जाने की बात है, तो दूसरी तरफ शेष संपत्ति पर कब्जे और दबाव के आरोप हैं।

अब बड़ा सवाल यही है कि क्या शोएब अहमद के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं? क्या जमीन पर वास्तव में अवैध कब्जा है? और यदि दबाव या धमकी के आरोप सही हैं तो इसके पीछे कौन लोग हैं?

शोएब अहमद ने वाराणसी पुलिस एवं प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से सुरक्षा, निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है। फिलहाल मामले में दूसरे पक्ष का विस्तृत बयान सामने आना बाकी है। प्रशासनिक और पुलिस जांच के बाद ही विवादित जमीन की वास्तविक स्थिति और लगाए जा रहे आरोपों की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

Share this story