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घटने के बाद फिर बढ़ने लगी गंगा, तटीय इलाकों में बढ़ी बेचैनी

घटने के बाद फिर बढ़ने लगी गंगा, तटीय इलाकों में बढ़ी बेचैनी
 काशी में फिर चढ़ने लगी गंगा, 12 घंटे में 14 सेंटीमीटर बढ़ा जलस्तर

 

वाराणसी। काशी में एक सप्ताह तक लगातार घटने के बाद गंगा के जलस्तर ने एक बार फिर बढ़ना शुरू कर दिया है। बुधवार सुबह करीब 69.15 मीटर तक पहुंचा जलस्तर गुरुवार सुबह 10 बजे तक बढ़कर 69.29 मीटर हो गया। केंद्रीय जल आयोग (CWC) के राजघाट गेज स्टेशन पर दर्ज आंकड़ों के मुताबिक गंगा का जलस्तर फिलहाल 0.5 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। जलस्तर में दोबारा हो रही बढ़ोतरी से गंगा और वरुणा किनारे बसे इलाकों के लोगों की चिंता बढ़ गई है।

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गुरुवार सुबह 10 बजे गंगा का जलस्तर 69.29 मीटर दर्ज किया गया। यहां चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर और खतरे का निशान 71.262 मीटर है। हालांकि मौजूदा जलस्तर अभी चेतावनी बिंदु से करीब 97 सेंटीमीटर नीचे है, लेकिन बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तटीय इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है।

बीते कई दिनों से गंगा के जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही थी। बुधवार सुबह तक जलस्तर घटकर 69.15 मीटर तक पहुंच गया था, लेकिन शाम से इसमें फिर बढ़ोतरी शुरू हो गई। गुरुवार सुबह तक करीब 14 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई। जलस्तर बढ़ने का सिलसिला जारी रहने से घाटों और नदी के आसपास के निचले इलाकों में पानी का दबाव बढ़ने लगा है।

गंगा का बढ़ता पानी केवल नदी किनारे के इलाकों तक सीमित नहीं है। इसकी सहायक नदी वरुणा के किनारे बसे दर्जनों मोहल्लों और बस्तियों पर भी इसका असर पड़ रहा है। गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी के साथ वरुणा नदी के जलस्तर पर भी दबाव बढ़ता है, जिससे वरुणा किनारे बसे निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।

गंगा के तटीय क्षेत्रों में कई पक्के घाट, घाटों की ओर जाने वाली गलियां और उन्हें आपस में जोड़ने वाले रास्ते पहले ही बाढ़ के पानी से प्रभावित हैं। ऐसे में जलस्तर में दोबारा बढ़ोतरी ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

जिला प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक वाराणसी में अब तक 16 गांव और 24 मोहल्ले बाढ़ से प्रभावित हैं। इन इलाकों में 877 परिवारों के करीब 4,082 लोग बाढ़ की चपेट में हैं। राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ की दो टीमें लगातार सक्रिय हैं।

प्रशासन और राहत एजेंसियों की ओर से प्रभावित इलाकों पर नजर रखी जा रही है। जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी होने की स्थिति में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी भी की जा रही है। फिलहाल गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन बढ़ता ट्रेंड प्रशासन के साथ ही तटीय इलाकों के लोगों के लिए सतर्क रहने का संकेत है।

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