बीएचयू में अंबेडकर लेक्चर सीरीज का पहला व्याख्यान, सामाजिक न्याय पर वक्ताओं का जोर
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान संकाय स्थित डॉ. बी.आर. अंबेडकर चेयर के तत्वावधान में अंबेडकर लेक्चर सीरीज के अंतर्गत प्रथम विशेष व्याख्यान का आयोजन शुक्रवार को सम्बोधि सभागार में किया गया। कार्यक्रम में सामाजिक न्याय, समरसता और भारतीय लोकतंत्र में बदलती वैचारिक सोच पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
मुख्य वक्ता प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय (प्रधानमंत्री लाइब्रेरी) के फेलो डॉ. सज्जन कुमार ने अपने व्याख्यान में कहा कि सामाजिक न्याय की स्थापना के संदर्भ में महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर के साथ-साथ डॉ. जगजीवन राम तथा कांशीराम जैसे भारतीय नेताओं के विचार भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने संत गुरु रविदास के विचारों और उनके सामाजिक संदेश पर भी प्रकाश डालते हुए छात्रों को उनसे प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
डॉ. सज्जन कुमार ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र में युवा पीढ़ी के बीच वैचारिक मतभेद धीरे-धीरे कम हो रहे हैं और नई पीढ़ी मुद्दा आधारित सोच को अपनाने की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के संदर्भ में गांधी और अंबेडकर के विचार आज भी पूरी तरह प्रासंगिक हैं तथा उन्हें एक-दूसरे के पूरक के रूप में देखा जाना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि प्रो. मनोज कुमार मिश्रा, समन्वयक एमसीपीआर, ने डॉ. अंबेडकर के जीवन, संघर्ष और सामाजिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि डॉ. अंबेडकर ने वर्ष 1924 में बहिष्कृत हितकारिणी सभा की स्थापना कर दलित समाज में शिक्षा के प्रसार और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया। साथ ही गोलमेज सम्मेलन में दलितों के लिए पृथक राजनीतिक प्रतिनिधित्व एवं सामाजिक अधिकारों की प्रभावी पैरवी की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. राजीव कुमार सिंह, चेयर प्रोफेसर, डॉ. बी.आर. अंबेडकर चेयर, सामाजिक विज्ञान संकाय, ने अंबेडकर चेयर की स्थापना के उद्देश्यों, सामाजिक न्याय एवं समरसता के क्षेत्र में उसकी भूमिका तथा भविष्य की कार्ययोजना पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर प्रो. घनश्याम, प्रो. ताबीर कलाम, प्रो. अरुणा कुमारी, डॉ. प्रशांत, डॉ. अजय यादव, डॉ. राजीव दूबे, डॉ. बी.आर. अंबेडकर चेयर कार्यालय के विवेक पांडेय, अजय कुमार, डॉ. प्रीति सिंह एवं डॉ. जियाउद्दीन सहित संकाय के शिक्षक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसे प्रो. राजीव कुमार सिंह ने प्रस्तुत किया।
