शादी कराने का झांसा देकर लाखों की ठगी, वाराणसी में फर्जी मैट्रिमोनियल गिरोह का पर्दाफाश
वाराणसी। कमिश्नरेट पुलिस की साइबर सेल और कैंट थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए अर्दली बाजार स्थित एक फर्जी मैट्रिमोनियल फर्म का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह की संचालिका समेत 10 महिलाओं को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह समाचार पत्रों में आकर्षक वैवाहिक विज्ञापन प्रकाशित कर लोगों को शादी कराने का झांसा देता था और "लाइफटाइम सब्सक्रिप्शन" के नाम पर हजारों रुपये वसूलने के बाद न तो युवक-युवती का वास्तविक संपर्क उपलब्ध कराता था और न ही जमा धनराशि वापस करता था।
मामले का खुलासा मंगलवार को पुलिस लाइन स्थित नवीन सभागार में आयोजित प्रेसवार्ता में डीसीपी गोमती जोन एवं साइबर नीतू कादयान तथा एसीपी कैंट/साइबर अपूर्व पांडेय ने किया।
डीसीपी नीतू कादयान ने बताया कि साइबर सेल को प्रतिबिंब पोर्टल और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दो संदिग्ध मोबाइल नंबरों के संबंध में लगातार शिकायतें मिल रही थीं। तकनीकी जांच, सीएएफ, सीडीआर तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर पता चला कि अर्दली बाजार स्थित विंध्यवासिनी नगर कॉलोनी के मकान संख्या-104 में 'शुभ मैट्रिमोनियल' के नाम से फर्जी फर्म संचालित की जा रही है।
सोमवार को साइबर सेल और कैंट थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्यालय पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान तीन कमरों में 10 महिलाएं मोबाइल और कीपैड फोन के माध्यम से ग्राहकों से बातचीत करती मिलीं। पुलिस ने मौके से 27 मोबाइल फोन, एक एसर टैबलेट, चार बिल वाउचर, दो रजिस्टर, तीन क्यूआर कोड, एक पेमेंट साउंड बॉक्स, तीन चेकबुक, एक पासबुक, पांच डेबिट कार्ड, किरायानामा, उद्यम पंजीकरण से संबंधित दस्तावेज तथा मैट्रिमोनियल रजिस्ट्रेशन फॉर्म बरामद किए।
पूछताछ में फर्म की संचालिका रागिनी देवी ने स्वीकार किया कि विभिन्न समाचार पत्रों में आकर्षक वैवाहिक विज्ञापन प्रकाशित कराए जाते थे। विज्ञापन देखकर संपर्क करने वाले लोगों को व्हाट्सएप के माध्यम से युवक-युवती की प्रोफाइल भेजी जाती थी और परिवार का संपर्क उपलब्ध कराने के नाम पर "लाइफटाइम सब्सक्रिप्शन" शुल्क जमा कराया जाता था। भुगतान के बाद न तो वास्तविक संपर्क कराया जाता था और न ही सदस्यता शुल्क लौटाया जाता था।
जांच में सामने आया कि एक महिला शिकायतकर्ता से चार किश्तों में 7,000 रुपये तथा दूसरी शिकायतकर्ता से 3,500 रुपये सदस्यता शुल्क के नाम पर वसूले गए। पुलिस के अनुसार, साइबर शिकायतों के चलते कुछ बैंक खाते फ्रीज होने के बाद गिरोह अन्य बैंक खातों और विभिन्न क्यूआर कोड के माध्यम से भी लोगों से धनराशि एकत्र कर रहा था।
पुलिस ने इस मामले में रागिनी देवी, सपना यादव, विधि श्रीवास्तव, रायमा परवीन, शमा खान, ज्योति सिंह, अजमत फातिमा, महक श्रीवास्तव, रूबी खान और आराधना शर्मा को गिरफ्तार किया है। सभी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जा रही है।
डीसीपी नीतू कादयान ने बताया कि बरामद मोबाइल फोन, बैंकिंग दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि गिरोह ने उत्तर प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों में कितने लोगों को इस तरह ठगी का शिकार बनाया और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की क्या भूमिका रही।
