साइबर अपराधियों को जेल से छुड़ाने वाला फर्जी जमानत गिरोह बेनकाब, 20 हजार में तैयार होते थे नकली दस्तावेज
वाराणसी। वाराणसी में साइबर अपराधियों को जेल से बाहर निकालने के लिए चल रहे फर्जी जमानत के बड़े खेल का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। साइबर थाना पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत दो शातिर जालसाजों को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी पहचान और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए अदालतों में साइबर ठगों की जमानत कराते थे। आरोपियों की पहचान शिवपुर थाना क्षेत्र के चमांव निवासी बलराम दास और जनार्दन सिंह के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक दोनों आरोपी फर्जी नाम ‘राजकुमार’ और ‘रिंकू’ का इस्तेमाल करते थे।

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी जमानत कराने के लिए पहले 15 से 20 हजार रुपये एडवांस लेते थे और जमानत होने के बाद भी मोटी रकम वसूलते थे। गिरोह पिछले करीब दो वर्षों से सक्रिय था और पहले भी साइबर ठगी के मामलों में फर्जी जमानतदार बन चुका था। पुलिस को हाल ही में 10 लाख रुपये की साइबर ठगी में जेल भेजे गए आरोपियों की जमानत की तैयारी की सूचना मिली थी, जिसके बाद जांच शुरू की गई।
पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आरोपियों ने चंदौली के एक प्रधान के नाम से फर्जी लेटर पैड तैयार करा रखा था। आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेजों में नाम व पता बदलकर नकली पहचान बनाई जाती थी। इसके बाद इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर अदालत में बेल बांड दाखिल किए जाते थे। इतना ही नहीं, संबंधित थानों की नकली मुहर बनाकर फर्जी सत्यापन रिपोर्ट तैयार की जाती थी और स्पीड पोस्ट के जरिए न्यायालय रजिस्ट्री भेजी जाती थी।
पुलिस के अनुसार गिरोह जेल में बंद साइबर अपराधियों से संपर्क करता था और पैसों के बदले खुद जमानतदार बनता या फर्जी जमानतदार उपलब्ध कराता था। एसीपी साइबर अपराध विदुष सक्सेना ने बताया कि आरोपियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और संपत्तियों की जांच कराई जा रही है। गिरोह से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति या कानूनी पेशे से जुड़े लोगों की संलिप्तता मिलती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने बताया कि आरोपी पहले भी साइबर ठगी के चर्चित मामलों में जमानतदार बन चुके हैं। इनमें रामनगर निवासी व्यक्ति के खाते से 8.33 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी और अस्सी क्षेत्र की युवती से 39 लाख रुपये की साइबर धोखाधड़ी का मामला शामिल है।
