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BHU की डॉ. दीपाली यादव को अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी से प्रतिष्ठित 'लेविस वालपोल फेलोशिप'

Dr. Deepali Yadav, Yale University Fellowship, BHU English Department, Lewis Walpole Fellowship, Visual Studies, Colonial Archive Research.

वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के अंग्रेज़ी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. दीपाली यादव ने एक बड़ी अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धि हासिल की है। उन्हें अमेरिका की प्रतिष्ठित येल यूनिवर्सिटी (Yale University) द्वारा 'लेविस वालपोल फेलोशिप' (Lewis Walpole Fellowship) प्रदान की गई है।

उल्लेखनीय है कि येल यूनिवर्सिटी को QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 में कला और मानविकी श्रेणी के अंतर्गत वैश्विक स्तर पर पाँचवाँ स्थान प्राप्त है।

दृश्य अध्ययन और कार्टून शोध को मिली अंतर्राष्ट्रीय मान्यता

यह फेलोशिप आमतौर पर उन शोधकर्ताओं को दी जाती है जो चित्रण (Illustration) और कार्टून के क्षेत्र में विशिष्ट कार्य करते हैं। डॉ. यादव को यह सम्मान उनके दृश्य अध्ययन (Visual Studies) के क्षेत्र में एक दशक लंबे गहन शोध, विशेषकर औपनिवेशिक कार्टूनों पर उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए दिया गया है।

शोध का विषय: औपनिवेशिक इतिहास और नारीवादी दृष्टिकोण

डॉ. यादव का शोध प्रोजेक्ट, “Expanding the Colonial Archive: Illustrating Homes of English Officers in India,” औपनिवेशिक इतिहास को एक नए नजरिए से देखता है। उनके शोध की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

निजी क्षेत्र का महत्व

यह शोध नारीवादी परियोजनाओं (Feminist Projects) में महत्वपूर्ण योगदान देता है, जहाँ घर के 'निजी क्षेत्र' को 'सार्वजनिक क्षेत्र' के समान महत्व दिया गया है।

इतिहास की नई समझ

यह अध्ययन दर्शाता है कि घरेलू और सीमित स्थान (Enclosed Spaces) किसी राष्ट्र के इतिहास को समझने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

डिकोलोनियल स्टडीज

यह कार्य व्यापक उपनिवेश-विमर्श (Decolonial Studies) को एक नई दिशा प्रदान करता है।

BHU अंग्रेज़ी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. दीपाली यादव को येल यूनिवर्सिटी (USA) से प्रतिष्ठित फेलोशिप। औपनिवेशिक कार्टूनों और दृश्य अध्ययन पर उनके शोध को मिली वैश्विक मान्यता।

येल यूनिवर्सिटी में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग

अपनी फेलोशिप के दौरान डॉ. दीपाली यादव, मैकमिलन सेंटर फॉर इंटरनेशनल एंड एरिया स्टडीज़ में साउथ एशियन स्टडीज़ काउंसिल के अध्यक्ष रोहित डे (Rohit De) के साथ सहयोग करेंगी। इस दौरान वे अपने शोध की भविष्य की संभावनाओं और अकादमिक विस्तार पर विचार-विमर्श करेंगी।

यह उपलब्धि न केवल बीएचयू बल्कि पूरे देश के शैक्षणिक जगत के लिए गौरव का विषय है।

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