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बाबा के दरबार में उमड़ा जनसैलाब, काशी की रफ्तार हुई धीमी

बाबा के दरबार में उमड़ा जनसैलाब, काशी की रफ्तार हुई धीमी
गर्मी की छुट्टियों में काशी हाउसफुल, सड़कों पर रेंग रहा यातायात
 

वाराणसी। गर्मी की छुट्टियों के बीच देशभर से बड़ी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु काशी पहुंच रहे हैं। पहाड़ी पर्यटन स्थलों पर भारी भीड़ और लंबे ट्रैफिक जाम की खबरों के बाद अब लोगों का रुख वाराणसी की ओर बढ़ गया है। इसका असर शहर की सड़कों, घाटों, मंदिरों, होटलों और धर्मशालाओं पर साफ दिखाई दे रहा है।

स्थिति यह है कि वाराणसी आने वाली कई ट्रेनों में सीटें उपलब्ध नहीं हैं, जबकि हवाई किराए भी सीजन के चलते उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं। ट्रैवल एजेंसियों के अनुसार परिवहन लागत में भी बढ़ोतरी हुई है, जिससे यात्रा खर्च बढ़ गया है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं और पर्यटकों का उत्साह कम नहीं हुआ है।

शहर के प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों—गोदौलिया, दशाश्वमेध घाट, शीतला घाट, मैदागिन और काशी विश्वनाथ धाम क्षेत्र—में दिनभर भारी भीड़ बनी हुई है। गोदौलिया क्षेत्र में कई बार यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए वाहनों का प्रवेश सीमित करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भीड़ के कारण पैदल चलना कई बार वाहन से यात्रा करने की तुलना में अधिक सुविधाजनक साबित हो रहा है।

होटल, धर्मशालाओं और बाजारों पर बढ़ा दबाव

पर्यटकों की बढ़ती संख्या का असर होटल, लॉज और धर्मशालाओं पर भी दिखाई दे रहा है। कई स्थानों पर कमरों की उपलब्धता सीमित हो गई है। वहीं, बढ़ती मांग और परिचालन लागत में वृद्धि के चलते भोजन और अन्य सेवाओं की कीमतों में भी इजाफा देखा जा रहा है।

व्यापारियों के अनुसार इन दिनों दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और दक्षिण भारत से बड़ी संख्या में लोग काशी पहुंच रहे हैं। इससे स्थानीय कारोबार को भी गति मिली है और कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान देर रात तक खुले रह रहे हैं।

बाबा दरबार में बढ़ा दर्शनार्थियों का दबाव

काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। सामान्य दर्शन के साथ-साथ वीआईपी दर्शन की मांग भी बढ़ी है। गंगा आरती स्थलों पर भी स्थिति ऐसी है कि समय से पहले पहुंचने वालों को ही बैठने या खड़े होने की जगह मिल पा रही है।

जून भर जारी रह सकती है भीड़

स्कूल-कॉलेजों की गर्मी की छुट्टियां जारी रहने के कारण जून माह में भी पर्यटकों की संख्या अधिक रहने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन के सामने यातायात और भीड़ प्रबंधन बड़ी चुनौती बना हुआ है। हालांकि स्थानीय व्यापारियों के लिए यह सीजन आर्थिक दृष्टि से लाभकारी साबित हो रहा है।

भीड़ और ट्रैफिक की स्थिति को लेकर अब पर्यटक और स्थानीय लोग मजाकिया अंदाज में कहते नजर आ रहे हैं—

"सुबह बनारस, शाम बनारस... जब देखो तब जाम बनारस।"

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