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BHU News: एमए इतिहास प्रश्नपत्र विवाद पर बोले अजय राय, “शिक्षा संस्थानों को नफरत और विभाजन की राजनीति से दूर रखा जाए”

BHU News: एमए इतिहास प्रश्नपत्र विवाद पर बोले अजय राय, “शिक्षा संस्थानों को नफरत और विभाजन की राजनीति से दूर रखा जाए”
वाराणसी। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष Ajay Rai ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय में एमए इतिहास की परीक्षा में पूछे गए “ब्राह्मणवादी पितृसत्ता” शब्द को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों का उद्देश्य समाज को जोड़ना और संवेदनशील बनाना होना चाहिए, न कि जातीय तनाव और वैचारिक विभाजन पैदा करना।

अजय राय ने कहा कि देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में इस प्रकार के प्रश्न समाज को सोचने पर मजबूर करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान समय में शिक्षा संस्थानों में आरएसएस की विचारधारा थोपी जा रही है, जिससे वैचारिक टकराव और सामाजिक विभाजन बढ़ रहा है।

“ब्राह्मण समाज का योगदान ऐतिहासिक”

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि भारत की सनातन परंपरा में ब्राह्मण समाज सदैव ज्ञान, शिक्षा, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक रहा है। वेद, उपनिषद, संस्कृत साहित्य और भारतीय दर्शन को आगे बढ़ाने में ब्राह्मण समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी जाति को अपमानित करने या संदेह के घेरे में खड़ा करने की मानसिकता भारतीय संस्कृति और संविधान दोनों के खिलाफ है।

भर्ती परीक्षाओं और फिल्मों का भी किया जिक्र

अजय राय ने कहा कि इससे पहले उत्तर प्रदेश की दरोगा भर्ती परीक्षा में ब्राह्मण समाज को “अवसरवादी” बताए जाने को लेकर विवाद हुआ था। इसके अलावा “घूसखोर पंडित” नामक फिल्म को लेकर भी व्यापक विरोध सामने आया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अब बीएचयू में इस तरह के प्रश्न यह संकेत देते हैं कि शिक्षा व्यवस्था को एक विशेष वैचारिक एजेंडे के तहत प्रभावित किया जा रहा है।

“विश्वविद्यालय समाज को जोड़ने का केंद्र हों”

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को लोकतांत्रिक बहस, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय एकता का केंद्र होना चाहिए, न कि राजनीतिक प्रयोगशाला। इतिहास और समाजशास्त्र जैसे विषयों को तथ्यों और संतुलित दृष्टिकोण के आधार पर पढ़ाया जाना चाहिए।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि देश की गंगा-जमुनी तहजीब, सामाजिक समरसता और सभी वर्गों के सम्मान की रक्षा सबसे ऊपर है। उन्होंने मांग की कि शिक्षा संस्थानों को राजनीतिक और वैचारिक हस्तक्षेप से मुक्त रखा जाए और विवादित विषयों को पाठ्यक्रम और परीक्षाओं में शामिल करने से बचा जाए।

अजय राय ने विश्वविद्यालय प्रशासन से विवादित प्रश्न को तत्काल वापस लेने और भविष्य में शिक्षा संस्थानों का उपयोग किसी राजनीतिक एजेंडे के लिए न किए जाने की मांग की।

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