बीएचयू गैंगरेप केस में सुनवाई आगे बढ़ी, 30 जुलाई को होगी अगली पेशी
वाराणसी। आईआईटी-बीएचयू की छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म के बहुचर्चित मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट (प्रथम) के न्यायाधीश कुलदीप सिंह की अदालत में शनिवार को सुनवाई हुई। इस दौरान सिटी कमांड सेंटर के सिपाही अनिल कुमार प्रजापति, जिन्होंने जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराया था, उनसे आरोपी कुणाल पांडेय और सक्षम पटेल की ओर से बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने जिरह पूरी कर ली।
वहीं, तीसरे आरोपी आनंद चौहान उर्फ अभिषेक की ओर से अधिवक्ता ने जिरह के लिए समय मांगा। अदालत ने अनुरोध स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 जुलाई की तिथि निर्धारित की है।
इससे पूर्व हुई सुनवाई में अभियोजन पक्ष ने अतिरिक्त गवाहों को पेश करने के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल किया था, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया था। शनिवार की सुनवाई में अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी मनोज गुप्ता तथा बचाव पक्ष के अधिवक्ता उपस्थित रहे।
अभियोजन के अनुसार, विवेचना के दौरान बीएचयू परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों से प्राप्त फुटेज के संबंध में भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65बी के तहत प्रमाणपत्र केस डायरी में शामिल किया गया था। प्रमाणपत्र मूल रूप में न्यायालय के अभिलेख पर उपलब्ध है, लेकिन इसे उपलब्ध कराने वाले साक्षी का नाम आरोपपत्र में दर्ज नहीं था। इसी आधार पर संबंधित साक्षी को गवाही के लिए तलब किए जाने का अनुरोध किया गया था।
इसके अतिरिक्त आरोपियों के कब्जे से बरामद मोबाइल फोन से संबंधित आईपीडीआर, सीडीआर, सीएएफ और जीपीआरएस का प्रमाणित रिकॉर्ड भी विवेचना के दौरान प्राप्त किया गया है। अभियोजन पक्ष ने इन दस्तावेजों से जुड़े साक्षियों को भी न्यायालय में पेश करने का अनुरोध किया था, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
गौरतलब है कि 2 नवंबर 2023 की रात बीएचयू परिसर में बाइक सवार तीन युवकों पर आईआईटी-बीएचयू की छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म करने का आरोप लगा था। पीड़िता की तहरीर पर लंका थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान कुणाल पांडेय, आनंद चौहान उर्फ अभिषेक और सक्षम पटेल के नाम सामने आने पर उन्हें आरोपी बनाया गया।
