BHU: दृश्य कला संकाय में 'दिव्याशा चौरसिया' की एकल छापाकला प्रदर्शनी का आगाज़, कलाकृतियों में दिखी जीवन की गहराई
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) का दृश्य कला संकाय एक बार फिर कलात्मक गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। संकाय की प्रसिद्ध 'अहिवासी कला वीथिका' में प्रिंटमेकिंग कलाकार दिव्याशा चौरसिया की त्रिदिवसीय एकल छापाकला प्रदर्शनी का भव्य शुभारंभ हुआ। यह प्रदर्शनी 28 अप्रैल से 30 अप्रैल तक कला प्रेमियों के लिए खुली रहेगी।
परंपरा और आधुनिकता का अनूठा समन्वय
इस प्रदर्शनी में दिव्याशा चौरसिया द्वारा निर्मित विभिन्न प्रिंटमेकिंग कृतियों को प्रदर्शित किया गया है। कलाकार ने अपनी विशिष्ट शैली के माध्यम से पारंपरिक और आधुनिक तकनीकों का सुंदर समन्वय किया है। उनकी कृतियों में समकालीन जीवन, मानवीय भावनाओं और सामाजिक परिवेश की गहन अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य दर्शकों को प्रिंटमेकिंग (छापाकला) की सूक्ष्मताओं से परिचित कराना है।
गरिमामयी उद्घाटन समारोह
प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रोफेसर उत्तमा दीक्षित (संकायाध्यक्ष, दृश्य कला संकाय) की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर मृदुला सिन्हा (मानित संकायाध्यक्ष) द्वारा किया गया। उद्घाटन के अवसर पर संकाय के वरिष्ठ शिक्षक और कलाकार मौजूद रहे, जिन्होंने दिव्याशा की तकनीकी दक्षता और सृजनात्मक संवेदनशीलता की मुक्त कंठ से सराहना की।
कला प्रेमियों का जुटा जमावड़ा
उद्घाटन समारोह के दौरान डॉ. ललित मोहन सोनी, डॉ. सुरेश चंद्र जांगिड़, डॉ. सुनील पटेल सहित संकाय के शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। प्रत्येक कृति में कलाकार की व्यक्तिगत अनुभूतियाँ और सौंदर्यबोध स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जो दर्शकों को एक विशिष्ट कलात्मक अनुभव प्रदान कर रहा है।
