वाराणसी: सामुदायिक गतिविधियों व संचार माध्यमों के जरिये कोविड-19 का प्रसार हुआ कम
वाराणसी: सामुदायिक गतिविधियों व संचार माध्यमों के जरिये कोविड-19 का प्रसार हुआ कम

टीकाकरण और कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर (कैब) ने निभाई अहम भूमिका

कोविड-19 से बचाव एवं सुरक्षा के लिए जागरूकता अभियान पर मंथन

वाराणसी। “कोविड-19 के प्रसार को कम करने में कोरोना रोधी टीकाकरण, सामुदायिक गतिविधियों एवं संचार माध्यमों ने अहम भूमिका निभाई है। प्रथम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, एएनएम, स्टाफ नर्स, डॉक्टरों ने दिन-रात ड्यूटी कर कोविड पॉज़िटिव मरीजों की देखभाल की। इस बीच कई लोगों ने अपनों को खोया। कई डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने अपनी जान गवाईं | इन सभी के बावजूद  विदेशों की तुलना में भारत में कोरोना की रफ्तार कम हो गयी है। कोविड के बचाव के टीकाकरण, कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर (कैब), सामुदायिक पहुँच एवं सहभागिता से आई जन जागरूकता से सकारात्मक प्रभाव पड़ा है”।  


 यह बातें गुरुवार को कैंटोनमेंट स्थित एक होटल में स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में आयोजित जन जागरण संस्थान, दी एशिया फाउंडेशन एवं दी यूरोपियन यूनियन के सहयोग से साउथ एशिया रीजनल प्रोजेक्ट टू स्ट्रेन्थ कम्यूनिटी रेसीलिएन्स टू कोविड-19 (कोविड-19 के प्रति सामुदायिक लचीलेपन को मजबूत) के तहत राज्य स्तरीय  कार्यशाला में कहीं गईं। कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ संदीप चौधरी, एशिया फाउंडेशन की राष्ट्र स्तरीय प्रतिनिधि नंदिता बरुआ, सदस्य नीति आयोग, बाल अधिकार उपसमिति संजय मिश्रा ने किया।

इस कार्यशाला का उद्देश्य  उपरोक्त संस्थाओ के द्वारा पिछले साल फरवरी से जुलाई 2022 तक उत्तर प्रदेश के पाँच जिलों  (वाराणसी, चंदौली, गाज़ीपुर, जौनपुर और मिर्ज़ापुर) के 10 विकासखंड मे कोविड 19 से बचाव एवं सुरक्षा के लिए जागरूकता अभियान पर मंथन एवं उसके अनुपालन में आने वाली समस्याओं के  उपाय पर  विशेष चर्चा की गयी।

वाराणसी: सामुदायिक गतिविधियों व संचार माध्यमों के जरिये कोविड-19 का प्रसार हुआ कम


इस दौरान सीएमओ ने कहा कि कोविड-19 के प्रसार को कम करने में कोरोना रोधी टीकाकरण, जन जागरूकता सम्बन्धी  सामुदायिक गतिविधियां, आशा-आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का गृह भ्रमण, जनपद प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य विभाग एवं गैर सरकारी स्वास्थ्य संगठनों ने बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसको भुलाया नहीं जा सकता। लोगों ने कोविड प्रोटोकॉल का पालन कर स्वयं के  अपने परिवार को सुरक्षित किया है। उन्होने ज़ोर दिया कि मलिन  बस्तियों में लोगों को स्वास्थ्य के प्रति व्यवहार परिवर्तन  करना  बेहद आवश्यक  है। कोरोना अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। कोरोना की एहतियाती  डोज़ समय से लगवा लें। मास्क, सेनिटाइजर और सोशल डिस्टेन्सिंग का पालन करते रहें। 


    इसके अतिरिक्त राष्ट्र स्तरीय प्रतिनिधि नंदिता बरुआ, सदस्य नीति आयोग संजय मिश्रा एवं अन्य लोगों ने अपने विचार रखे। कार्यशाला में पांचों जिलों के चिन्हित ब्लॉक की आशा कार्यकर्ता, एएनएम, ग्राम प्रधान, प्रभारी चिकित्साधिकारी, डीएचईआईओ हरिवंश यादव, तीनों संस्थाओं के राज्य एवं जिला स्तरीय प्रतिनिधि एवं अन्य लोग शामिल रहे।

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