महसा अमीनी की हत्या पर सामाजिक संगठनों में उबाल
महसा अमीनी की हत्या पर सामाजिक संगठनों में उबाल

वाराणसी। ईरान के कुर्दिस्तान प्रान्त में ईरानी मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों एवं हिजाब की गुलामी से मुक्ति की लड़ाई लड़ने वाली 22 वर्षीय आंदोलनकारी सामाजिक कार्यकर्त्ता महसा अमीनी की पुलिस ने पीटकर हत्या कर दी।


इसी हत्या से सामाजिक संगठनों में ईरान सरकार और कट्टरपंथियों के खिलाफ गहरी नाराजगी है। विशाल भारत संस्थान एवं मुस्लिम महिला फाउण्डेशन के संयुक्त तत्वावधान में सामाजिक कार्यकर्त्ताओं ने लमही स्थित सुभाष मन्दिर के सामने धरना प्रदर्शन किया।


सामाजिक कार्यकर्त्ताओं ने हाथों में तख्ती लेकर प्रदर्शन किया। सामाजिक कार्यकर्त्ताओं ने सवाल पूछा कि जरूरी क्या– जिंदगी या हिजाब ? महसा अमीनी की हत्या क्यों ? हिजाब की गुलामी से आजादी कब ? विश्व समुदाय ईरान सरकार पर प्रतिबंध लगाए। महसा अमीनी जिन्दाबाद, मुक्ति आन्दोलन जिन्दाबाद।


धर्म के नाम पर ईरान सरकार द्वारा कराई गई सामाजिक कार्यकर्त्ता महसा अमीनी की हत्या दुनियां के सभ्य समाज के लिए कलंक है। इस सरकारी हत्या को दुनियां के लोग निंदा करें। यह कैसे सम्भव है कि औरत को गुलाम बनाने के लिए पुलिस की नियुक्ति की जाए और सिर्फ हिजाब न पहनने पर पुलिस द्वारा हत्या कर दी जाए ? इन सभी सवालों के साथ सामाजिक कार्यकर्त्ताओं ने कहा कि महसा अमीनी की मुक्ति आन्दोलन को जारी रखा जाएगा।


मुस्लिम महिला फाउण्डेशन की नेशनल सदर नाजनीन अंसारी ने कहा कि दुनियां के मानवाधिकार चैंपियन्स कहां हैं ॽ एक 22 साल की लड़की की सिर्फ इसलिए हत्या कर दी जाए कि वह इस बात के लिए लड़ रही थी कि हमें हिजाब से मुक्ति चाहिए। विश्व समुदाय यह तय कर ले कि हिजाब जरूरी है या जिन्दगी। सभ्य समाज और मानवता के लिए महसा अमीनी की हत्या कलंक है। महिलाएं अपनी आजादी की लड़ाई लड़ रहीं हैं। हम महसा अमीनी की शहादत को व्यर्थ नहीं जाने देंगे।


विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ० राजीव श्रीगुरूजी ने कहा कि सामाजिक कार्यकर्त्ताओं ने पूरी दुनियां के पीड़ितों की आवाज उठाई है। ईरान के बेटियों की आवाज बुलन्द करने पर महसा अमीनी की हत्या हृदय पर आघात है। हिजाब के नाम पर कुछ लोग भारत में कट्टरपंथी सोच फैलाना चाहते हैं। इस्लामी देश तय कर ले कि वे दुनियां में अकेले रहना चाहते हैं या सबके साथ। सामाजिक क्रांति को आगे बढाने वाली महसा अमीनी की सरकार द्वारा हत्या मानवता के लिए अभिशाप और बेटियों के लिए अशुभ संकेत है। इसे रोकना होगा, ईरानी बेटियों की आवाज भारत की बेटियां उठाएंगी।


सामाजिक कार्यकर्त्ता नजमा परवीन ने कहा कि कुछ लोग महिलाओं के ठेकेदार बन गए हैं। वे तय नहीं करेंगे कि महिलाएं क्या पहनें ॽ कट्टरपंथियों के खिलाफ महिलाओं को एक जुट होना पड़ेगा।


विशाल भारत संस्थान की राष्ट्रीय महासचिव अर्चना भरतवंशी ने कहा कि महसा अमीनी की हत्या मानवाधिकार की वकालत करने वाले देशों के मुंह पर तमाचा है। अमीनी महिलाओं के हक के लिए आन्दोलन कर रही थी। वह हमेशा महिलाओं के अधिकारों के लिए जानी जाती रहेंगी। वह अमर रहेगी।


धरना प्रदर्शन में खुशी भारतवंशी, इली भारतवंशी, उजाला भारतवंशी, दक्षिता भारतवंशी, बिन्दू देवी, नगीना देवी, किसुना देवी, ममता देवी, किरन देवी, अंजू श्रीवास्तव, अर्चना श्रीवास्तव, पार्वती देवी, हीरामनी देवी, पार्वती देवी, प्रभावती देवी, बेचना देवी, सुनीता श्रीवास्तव, रमता श्रीवास्तव, ममता श्रीवास्तव, पूनम श्रीवास्तव, गीता देवी आदि लोग शामिल रहीं।

Share this story