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वाराणसी के कृषि विश्वविद्यालय द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन परियोजना के तहत पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन
आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन परियोजना के तहत पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न

वाराणसी। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय,कुमारगंज,अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र,कल्लीपुर,वाराणसी द्वारा  फसल अवशेष प्रबंधन परियोजना के अंतर्गत पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन शुक्रवार को सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ।

 

 

इस कार्यक्रम में केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉक्टर नरेंद्र रघुबंशी ने कार्यक्रम में उपस्थित किसानों का स्वागत करते हुए किसानो से फसल अवशेष न जलाने की अपील की।

 

 

कार्यक्रम में उपस्थित केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर नवीन सिंह ने किसानो को फसल अवशेष जलाने पर होने वाले दंडनीय कार्यवाही के बारे में बताते हुए कहा कि हार्वेस्टर के साथ पुआल काटने वाले यंत्र को साथ चलाकर ही धान की कटाई करनी चाहिए।

ऐसा नहीं करने पर उनके खिलाफ त्वरित कार्यवाही करने का आदेश है। कार्यक्रम के सह अन्वेषक डॉक्टर राहुल कुमार सिंह ने बताया की क़ृषि में उपयोग होने वाली मशीनों जैसे कि कल्टीवेटर
रोटावेटर,सुपर सीडर तथा हैप्पी सीडर का प्रयोग करके पराली का प्रबंधन आसानी से किया जा सकता है।

उन्होंने बताया की लाभदायक सूक्ष्म जीवों का प्रयोग करके भी फसल अवशेषों को सडा गला कर गुणवत्ता युक्त जैविक खाद तैयार की जा सकती है।

केंद्र के वैज्ञानिक बीज तकनीक प्रकाश सिंह ने फसल अवशेषों का आच्छादन के रूप में प्रयोग करने की सलाह दी। सलाह के साथ साथ फसल अवशेष का मिट्टी पर होने वाले लाभ तथा हानियों पर भी प्रकाश डाला। 


उद्यान वैज्ञानिक डॉक्टर मनीष पांडेय ने स्वच्छता के प्रति नैतिक मूल्यों की याद दिलाते हुए, इसे असल जीवन में उतारने की सलाह देते हुए रबी की औद्यानिक फ़सलों पर अपनी बात रखी।

केंद्र की गृह वैज्ञानिक डॉक्टर प्रतीक्षा सिंह ने समस्त किसानो को फसल अवशेष न जलाने की शपथ दिलाई।

इस अवसर पर केंद्र के कर्मचारी  अरविंद,अशोक सहित अराजी लाइन विकास खंड के लगभग दो दर्जन से भी अधिक किसानो ने प्रतिभाग लिया।

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