ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी विवाद मामले में जिला जज वाराणसी ए.के. विश्वेश की अदालत में सुनवाई आज
ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी विवाद मामले में जिला जज वाराणसी ए.के. विश्वेश की अदालत में सुनवाई आज

वाराणसी। आज से शुरू होगा इस मामले का ट्रायल। सुनवाई से पहले तैयारियों में जुटा हिन्दू पक्ष। हिंदू पक्ष ने इसी मामले में एक नई याचिका दायर की है जिसमें कहा गया है कि जो शृंगार गौरी मंदिर है उसमें चारों वादी महिलाओं को दर्शन करने का अधिकार दिया जाए एवं पूरे ज्ञानवापी क्षेत्र का एएसआई के द्वारा कार्बन डेटिंग से सर्वे किया जाए।

 

 

वही सुनवाई से पहले मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में दिया है प्रार्थना पत्र।  मुस्लिम पक्ष ने अदालत से मांगा है 8 हफ्ते का समय।


मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर इस मामले को 8 हफ्ते बाद सुनने की अपील की है। वही हिंदू पक्ष ने इस अपील पर केस को देरी करने एवं तथ्यों से दूर ले जाने वाला कृत्य करार दिया है।

आज इस मामले की दोपहर 12:00 बजे के बाद होगी सुनवाई। केस की पोषनीयता को लेकर 12 सितंबर को जिला जज वाराणसी ने सुनाया था फैसला. फैसले के अनुसार यह मुकदमा सुनवाई योग्य है। 

इसके बाद हिंदू पक्ष ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस पूरे मामले में कैविएट दाखिल कर दिया था। वही मुस्लिम पक्ष की ओर से कहा गया कि वह भी हाईकोर्ट जाएंगे।

लेकिन अभी खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से हाईकोर्ट में याचिका नहीं दायर की गई है।

वह इस मामले को देखते हुए वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट ने सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर रखी है। कचहरी की सुरक्षा पुलिस एलआईयू एसटीएफ व एटीएस के हवाले है।


पुलिस कमिश्नर ए सतीश गणेश खुद कंट्रोल रूम से कर रहे हैं पूरे शहर की मॉनिटरिंग।

ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी केस की सुनवाई आज। मसाजिद कमेटी ने मांगा है 8 हफ्ते का समय 

ज्ञानवापी-मां श्रृंगार गौरी केस की नियमित सुनवाई आज से वाराणसी के जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेस की अदालत में शुरू होगी। बीती 12 सितंबर को जिला जज की कोर्ट ने अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी की आपत्तियों को खारिज करते हुए आदेश दिया था कि मां श्रृंगार गौरी केस सुनवाई योग्य है। इसके साथ ही सुनवाई की अगली डेट 22 सितंबर फिक्स कर दी थी।

जिला जज की कोर्ट के आदेश के खिलाफ मसाजिद कमेटी इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिवीजन पिटीशन दाखिल कर सकती है। मसाजिद कमेटी की रिवीजन पिटीशन के मद्देनजर हिंदू पक्ष की महिलाओं की ओर से हाईकोर्ट में कैविएट पिटीशन दाखिल की जा चुकी है। ताकि, अदालत कोई भी आदेश देने से पहले वादिनी महिलाओं का पक्ष जरूर सुने।

आज की सुनवाई में क्या होगा

वादिनी महिलाओं के अधिवक्ता सुभाष नंदन चतुर्वेदी और सुभाष त्रिपाठी के अनुसार, आज सबसे पहले उन एप्लिकेशन पर सुनवाई होगी जिन्होंने श्रृंगार गौरी केस में पार्टी बनने के लिए कोर्ट से अनुरोध किया है। ऐसी एप्लिकेशन की संख्या 20 से ज्यादा है।

इन एप्लिकेशन पर सुनवाई के अलावा केस पॉइंट यानी वाद बिंदु भी तय किया जाएगा। संबंधित पक्षकार केस में अपनी जवाबदेही भी कोर्ट में दाखिल करेंगे। इसके अलावा ज्ञानवापी के तहखाने की कमीशन की कार्रवाई के लिए पहले ही एप्लिकेशन दी गई थी। उस पर भी सुनवाई होनी है।

मसाजिद कमेटी के एडवोकेट रईस अहमद और एखलाक अहमद ने बताया कि हमारी ओर से एक एप्लिकेशन दी गई है। हमने कोर्ट को बताया है कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि श्रृंगार गौरी केस को जिला जज स्तर के न्यायाधीश सुनेंगे।

अगर उनके आदेश से कोई पक्ष असहमत होता है तो वह उसके खिलाफ उच्च अदालत में जा सकता है। इसके लिए उसे 8 हफ्ते का समय दिया जाना चाहिए। इसलिए हमने कोर्ट से अनुरोध किया है कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ध्यान में रखते हुए हमें 8 हफ्ते का समय देने पर विचार करें। कोर्ट ने हमारी एप्लिकेशन पर सुनवाई के लिए 22 सितंबर की डेट फिक्स की है। 

साल भर पहले दाखिल हुआ था केस

18 अगस्त 2021 को विश्व वैदिक सनातन संघ के प्रमुख जितेंद्र सिंह बिसेन के नेतृत्व में दिल्ली की राखी सिंह और वाराणसी की सीता साहू, मंजू व्यास, रेखा पाठक व लक्ष्मी देवी ने सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट में मुकदमा दाखिल किया था।

पांचों महिलाओं ने मांग की थी कि ज्ञानवापी परिसर स्थित मां शृंगार गौरी के मंदिर में नियमित दर्शन-पूजन की अनुमति मिले। इसके साथ ही ज्ञानवापी परिसर स्थित अन्य देवी-देवताओं के विग्रहों की सुरक्षा के लिए मुकम्मल इंतजाम हो।

कोर्ट ने मौके की स्थिति जानने के लिए कमीशन गठित करते हुए अधिवक्ता कमिश्नर नियुक्त करने और तीन दिन के अंदर पैरवी का आदेश दिया था। इसके विरोध में अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी का कहना था कि श्रृंगार गौरी केस सुनवाई के योग्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के क्रम में वाराणसी के जिला जज ने आदेश सुनाया कि श्रृंगार गौरी केस सुनवाई योग्य है।

सेना में भर्ती के नाम पर ठगने वाले दो गिरफ्तार: मिलिट्री इंटेलिजेंस की सूचना पर यूपी-STF ने वाराणसी में की कार्रवाई

सेना में भर्ती के नाम पर ठगने वाले दो गिरफ्तार: मिलिट्री इंटेलिजेंस की सूचना पर यूपी-STF ने वाराणसी में की कार्रवाई

वाराणसी। सेना में भर्ती कराने का झांसा देकर नवयुवकों को ठगने वाले अंतरराज्यीय जालसाज गिरोह के सरगना और उसके गुर्गे को यूपी-STF ने वाराणसी के छावनी क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। ]

गिरफ्त में आए जालसाजों की शिनाख्त झारखंड के रांची स्थित कोकर निवासी अमित कुमार चौधरी और न्यू हैदर बली रोड बजरंग नगर के सचिन कुमार पांडेय के तौर पर हुई है।

दोनों के पास से रेलवे के 5 फर्जी नियुक्ति पत्र, चार मोबाइल, 7000 रुपए और स्विफ्ट डिजायर कार बरामद की गई है। दोनों आरोपियों को कैंट थाने की पुलिस को सौंप दिया गया है।

सर्विलांस और मुखबिर की मदद से मिली सफलता

यूपी-STF को मिलिट्री इंटेलिजेंस से सूचना मिली थी कि वाराणसी और उसके आसपास के जिलों के साथ ही अन्य बड़े शहरों में सेना में भर्ती कराने का झांसा देकर एक गिरोह बेरोजगार युवकों को ठग रहा है।

 यूपी-STF की वाराणसी इकाई के एडिशनल एसपी विनोद सिंह ने बताया कि इंस्पेक्टर अनिल कुमार सिंह के नेतृत्व में टीम गठित कर गिरोह की धरपकड़ का टॉस्क दिया गया।

सर्विलांस और मुखबिरों की मदद से सूचना एकत्र की गई। सामने आया कि आर्मी में भर्ती के नाम पर ठगी करने वाले गैंग का सरगना अमित कुमार चौधरी अपने कुछ साथियों के साथ छावनी क्षेत्र के डाक बंगले में मुरादाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, पंजाब और महाराष्ट्र के लड़कों को बुलाया था।

अमित ने उन लड़कों को कहा था कि मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस (MES) की परीक्षा होनी है, जबकि ऐसा कुछ नहीं था। सूचना के आधार पर इंस्पेक्टर अनिल अपनी टीम के साथ डाक बगले पहुंचे तो पता लगा कि अमित और अन्य सभी लोग वहां से निकल गए हैं।

उसी दौरान वहां मौजूद कुछ युवकों से अमित के बारे में पूछताछ करने पर उन्होंने उसकी कार का नंबर बताते हुए कहा कि अभी वह तत्काल निकला है। इसके आधार पर यूपी-STF की टीम ने पीछा कर अमित और उसके गुर्गे सचिन को छावनी क्षेत्र से ही दबोच लिया। 

छावनी क्षेत्र होने की वजह से सबको हो जाता था विश्वास

पूछताछ में अमित ने बताया कि उसका अंतरराज्यीय गिरोह है। छावनी क्षेत्र स्थित डाक बंगले में कमरा बुक करा कर वह विभिन्न राज्यों के लड़कों को मिलिट्री इंजिनियरिंग सर्विस (MES) में भर्ती के नाम पर बुलाया था।

उसने सभी का फिंगर प्रिंट लिया था। इसके बाद कबीरचौरा मंडलीय अस्पताल से मेडिकल कराकर फर्जी ज्वानिंग लेटर थमाया था।

इस काम के लिए एडवांस 1 से 2 लाख रुपए पहले वह लेते है। मेडिकल कराने के बाद 4 लाख रुपए फिर लेता है। पैसा मिल जाने के बाद फर्जी नियुक्ति प्रमाण पत्र संबंधित लड़के के पते पर पोस्ट से भेजा जाता है। बताया कि उसके गैंग का सदस्य राकेश कुमार बिष्ट MES की फर्जी आईडी दिखाकर लडकों को फंसाकर लाता है।

डाक बंगले में पहचान के लोगों के माध्यम से आराम से कमरा बुक हो जाता है। डाक बंगला छावनी क्षेत्र में होने के कारण लड़के उसे मिलिट्री का ऑफिस समझ कर विश्वास भी कर लेते हैं कि सब सही काम हो रहा है। एडिशनल एसपी विनोद सिंह ने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्तों के अलावा गिरोह में शामिल अन्य सदस्यों के संबंध में जांच की जा रही है।

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